देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची को पूरी तरह से त्रुटिरहित और अद्यतन बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने कमर कस ली है। प्रदेश में आज से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम की शुरुआत हो गई है। इस अभियान के तहत अब बूथ लेवल अफसर (बीएलओ) सीधे मतदाताओं के दरवाजे पर दस्तक देंगे और उन्हें गणना फॉर्म उपलब्ध कराएंगे। हालांकि, इस बार की प्रक्रिया में सख्ती भी बढ़ा दी गई है। अगर किसी मतदाता का विवरण साल 2003 के पुराने डेटाबेस से मैच नहीं होता है या जानकारी अधूरी मिलती है, तो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) की तरफ से सीधा नोटिस जारी किया जाएगा।

जमीनी स्तर पर इस अभियान को कैसे अंजाम दिया जाएगा, इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश भर के सभी 11,733 बीएलओ को गणना फॉर्म सौंप दिए गए हैं। अगले एक महीने तक यानी 7 जुलाई तक बीएलओ घर-घर जाकर इन फॉर्मों को भरवाएंगे और बीएलओ ऐप के जरिए पूरे डेटा को डिजिटलाइज करेंगे। जो मतदाता किसी कारणवश बीएलओ से नहीं मिल पाते, वे सुविधा के लिए ‘बुक ए कॉल’ (Book a Call) का विकल्प भी चुन सकते हैं। डॉ. पुरुषोत्तम ने प्रदेश के सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे इस राष्ट्रीय कार्य में बीएलओ को पूरा सहयोग करें।
निर्वाचन आयोग की ओर से जारी नए दिशा-निर्देशों पर नजर डालें तो साफ है कि डेटा के सटीक सत्यापन पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है। नियमों के मुताबिक, जिन मतदाताओं का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया या 2003 की मतदाता सूची के डेटाबेस से उनका डेटा मैच नहीं खाता, उन्हें ईआरओ की ओर से नोटिस भेजा जाएगा। ऐसे में मतदाताओं को अपनी नागरिकता और जन्म से जुड़े वैध दस्तावेज जमा करने ही होंगे।
दस्तावेजों की शर्तें मतदाता की जन्मतिथि के आधार पर तीन अलग-अलग समय श्रेणियों में बांटी गई हैं, जिन्हें समझना हर मतदाता के लिए बेहद जरूरी है। पहली श्रेणी में वे मतदाता हैं जिनका जन्म एक जुलाई 1987 से पहले भारत में हुआ था। ऐसे लोगों को अपनी जन्मतिथि और जन्म स्थान साबित करने वाला कोई एक वैध दस्तावेज देना होगा। दूसरी श्रेणी एक जुलाई 1987 से लेकर दो दिसंबर 2004 के बीच जन्मे मतदाताओं की है। इन्हें न केवल स्वयं का, बल्कि अपने माता या पिता में से किसी एक का जन्म स्थान और जन्मतिथि साबित करने वाला दस्तावेज भी पेश करना अनिवार्य होगा। तीसरी और सबसे सख्त श्रेणी दो दिसंबर 2004 के बाद जन्मे युवा मतदाताओं के लिए है। इन्हें स्वयं के साथ-साथ माता और पिता, दोनों के जन्म स्थान व तिथि साबित करने वाले अलग-अलग दस्तावेज देने होंगे। विशेष बात यह है कि यदि माता-पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक नहीं है, तो ऐसे मतदाताओं को अपने जन्म के समय उनके वैध पासपोर्ट और वीजा की प्रति भी जमा करानी होगी।
प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि इस सख्त सत्यापन प्रक्रिया से मतदाता सूची में दर्ज फर्जी या मृत लोगों के नाम हटाने और प्रवासी मतदाताओं की सटीक पहचान करने में मदद मिलेगी। इसलिए मतदाताओं को सलाह दी जा रही है कि वे बीएलओ के संपर्क में रहें और नोटिस आने की स्थिति में तुरंत निर्धारित दस्तावेज तैयार रखें, ताकि सूची से नाम कटने जैसी परेशानी से बचा जा सके।
