श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल के निर्देश एवं जिला जज सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पौड़ी गढ़वाल के आदेशानुसार शनिवार को बाह्य न्यायालय श्रीनगर में विशेष लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य परक्राम्य लिखत अधिनियम (138 NI Act) यानी चेक बाउंस से जुड़े लंबित मामलों का त्वरित और आपसी सहमति से निस्तारण करना था। सिविल जज एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कुमारी अलका की अध्यक्षता वाली विशेष लोक अदालत पीठ ने पांच मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया, जिससे वादकारियों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिली।

बाह्य न्यायालय में आयोजित इस विशेष पीठ में सिविल जज कुमारी अलका ने अध्यक्षता की, जबकि विद्वान अधिवक्ता प्रदीप मैठाणी ने सदस्य के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लोक अदालत के दौरान दोनों ने वादकारियों को लोक अदालत के लाभों, समय की बचत और आपसी समझौते के महत्व से अवगत कराया। 138 NI एक्ट के मामलों में समझौता होने पर न्यायालय द्वारा जुर्माना वापस करने और मामले को रद्द करने के प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए पीठ ने पांच लंबित प्रकरणों का निपटारा किया। इस पहल से न केवल न्यायालय पर लंबित मामलों का बोझ कम हुआ, बल्कि आमजन को त्वरित न्याय भी सुलभ हुआ।
बार एसोसिएशन श्रीनगर के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं ने इस विशेष लोक अदालत के आयोजन में पूर्ण सहयोग प्रदान किया। इस अवसर पर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमेश चन्द्र जोशी, संरक्षक अनूप श्री पांथरी, महासचिव ब्रह्मानंद भट्ट, पूर्व महासचिव विकास पंत, पूर्व उपाध्यक्ष विवेक जोशी, सह-सचिव देवी प्रसाद खरे और कोषाध्यक्ष सुबोध भट्ट मौजूद रहे। इसके अलावा अधिवक्ता विकास कठैत, आरपी थपलियाल, राखी राय, महेंद्र पाल सिंह रावत, भूपेंद्र पुंडीर, सुरेंद्र सिंह रौथान, सुधीर उनियाल, चंद्रभानु तिवारी, बलवीर सिंह रौतेला, नितेश भारती, गौरव उपाध्याय, कविता मेवाड़, कुलदीप दानू, प्रेरणा काला और लक्ष्मीकांत ने भी वादकारियों को समझौते के लिए प्रेरित करने में अहम भूमिका निभाई।

न्यायालयीन कार्यों को सुचारू रूप से संपन्न कराने में न्यायालय के कर्मचारियों का भी विशेष योगदान रहा। इस दौरान रीडर ज्योतिष धिल्डियाल, शिवानी बिष्ट, निर्मल सिंह, सोहन सिंह तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी आनन्द प्रसाद और भारती सहित अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे। विशेष लोक अदालत के सफल आयोजन और त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया ने यह संदेश दिया है कि न्यायिक प्रणाली और विधिक समुदाय के संयुक्त प्रयासों से आमजन को सुलभ, सस्ता और त्वरित न्याय दिलाया जा सकता है।
