नई टिहरी। नई टिहरी में जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल की अध्यक्षता में शुक्रवार को पिरूल (चीड़ की सूखी पत्तियां) के संग्रहण एवं निस्तारण को लेकर एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें इस पहल को वनाग्नि नियंत्रण और स्थानीय आजीविका से जोड़ते हुए प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया। बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि पिरूल का सुनियोजित संग्रहण सुनिश्चित किया जाए, जिससे जंगलों में आग की घटनाओं को नियंत्रित करने के साथ-साथ ग्रामीण स्तर पर आय और रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकें। उन्होंने सभी विकासखंडों में इस कार्य की नियमित मॉनिटरिंग करने और समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।

जिलाधिकारी ने प्रभागीय वनाधिकारी को 30 अप्रैल तक विस्तृत रूट प्लान तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि पिरूल संग्रहण की प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा सके। साथ ही सभी खंड विकास अधिकारियों और खंड शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में स्थानीय कार्ययोजना बनाकर उसे लागू करने के निर्देश दिए गए। बैठक के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि इस कार्य में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है, जिससे अभियान का प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखाई दे सके।
बैठक में नोएडा से आए टेक्नोलॉजी पार्टनर ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से पिरूल आधारित ब्रिकेट और पेललेट निर्माण की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिरूल का उपयोग ईंधन के रूप में कर ब्रिकेट और पेललेट तैयार किए जा सकते हैं, जिससे वनाग्नि के खतरे को कम करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

जिलाधिकारी ने इस पहल को जनपद में मिशन मोड में लागू करने पर जोर देते हुए जनप्रतिनिधियों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ा जा सकता है।
बैठक में डीएफओ टिहरी पुनीत तोमर, डीएफओ नरेंद्रनगर दिगंत नायक, डीएफओ संदीपा, सभी बीडीओ और बीईओ सहित अन्य संबंधित अधिकारी भौतिक और वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।
