Shraddhalu Pahunche Adi Kailash

12 दिनों में 7 हजार श्रद्धालु पहुंचे आदि कैलाश, पिछले साल के मुकाबले चार गुना बढ़ी संख्या

पिथौरागढ़।

उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में इस बार आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं और पर्यटकों में अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। यात्रा शुरू हुए महज 12 दिनों में ही 7 हजार से अधिक लोग दर्शन के लिए पहुंच चुके हैं। यह संख्या पिछले साल की तुलना में चार गुना ज्यादा है।

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1 मई से शुरू हुई यात्रा के बाद धारचूला से ज्योलिंगकांग तक पूरे व्यास घाटी क्षेत्र में चहल-पहल बढ़ गई है। प्रशासन रोजाना 500 से 700 तक इनर लाइन परमिट जारी कर रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस पूरे सीजन में यात्री संख्या 50 हजार का आंकड़ा पार कर सकती है।यात्रियों की बढ़ती संख्या का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। पिथौरागढ़ शहर के अधिकांश होटल भर चुके हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित ढाबों और छोटे होटलों में भी अच्छी भीड़ नजर आ रही है।

बड़ी संख्या में बाइकर्स भी आदि कैलाश यात्रा पर निकल रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार का सीजन काफी बेहतर चल रहा है।आदि कैलाश यात्रा को कैलाश मानसरोवर यात्रा का आसान भारतीय विकल्प माना जाता है। यह यात्रा आमतौर पर 5 से 7 दिनों में पूरी हो जाती है। यात्रियों के लिए 25 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक के विभिन्न पैकेज उपलब्ध हैं, जिनमें ठहरने, भोजन और परमिट की सुविधाएं शामिल हैं।

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यात्री अपनी सुविधा और बजट के अनुसार पैकेज चुन सकते हैं।यह यात्रा 3,000 मीटर से 5,500 मीटर तक की ऊंचाई वाले क्षेत्रों से होकर गुजरती है। इसलिए स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बने रहते हैं। प्रशासन ने यात्रियों के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट और इनर लाइन परमिट को अनिवार्य कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें अलर्ट मोड पर हैं। हेलीकॉप्टर सेवाओं और बढ़ती पर्यटक संख्या को देखते हुए कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

अक्टूबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश दौरे के बाद इस यात्रा की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बढ़ी है। तीन साल पहले यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या 2 हजार से भी कम थी, जो अब 30 हजार के पार पहुंच चुकी है। इस बार 40 से 50 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। कम भीड़, प्राकृतिक सुंदरता और कम समय में पूरी होने वाली यात्रा युवाओं को खासतौर पर आकर्षित कर रही है।पर्यटन बढ़ने से गुंजी, कुटी और नाबी जैसे सीमांत गांवों में रौनक लौट आई है।

जहां पहले पलायन बड़ी समस्या था, वहां अब होमस्टे, टैक्सी और गाइड सेवाओं से स्थानीय लोगों की आमदनी बढ़ रही है। राज्य सरकार ने क्षेत्र में पर्यटन और आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए करीब 17 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। BRO ने गुंजी से ज्योलिंगकांग तक सड़क को बेहतर बनाया है, जिससे यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुगम हो गई है।आदि कैलाश यात्रा के बढ़ते चलन से पिथौरागढ़ के सीमांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।

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