देहरादून।
मियानवाला इलाके में परिवहन विभाग के एक इंस्पेक्टर पर रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगने के बाद हंगामा हो गया। वाहन कारोबारी गजराज चौहान की दुकान पर पहुंचे इंस्पेक्टर को कारोबारी और उसके साथियों ने दुकान के अंदर बैठाकर बाहर से शटर बंद कर दिया। करीब डेढ़ घंटे तक इंस्पेक्टर को अंदर बंद रखा गया। इस दौरान दुकान के बाहर एक बैनर भी लगा दिया गया, जिसमें लिखा था — “मैं परिवहन विभाग देहरादून का आरटीओ हूं, मैं बिना महीना लिए गाड़ी नहीं चलने देता।”

घटना के दौरान दुकान के अंदर रखी नोटों की गड्डियां भी वीडियो में दिखाई दीं। कारोबारी पक्ष का आरोप है कि यही रकम इंस्पेक्टर लेने आए थे।कारोबारी गजराज चौहान ने बताया कि यह इंस्पेक्टर हर महीने रिश्वत लेने आते हैं। सोमवार को जैसे ही वे दुकान में पहुंचे, बाहर से शटर बंद कर दिया गया। लोगों ने इंस्पेक्टर को अंदर ही रोके रखा और नारेबाजी की। कई लोगों ने पूरे घटनाक्रम को मोबाइल पर लाइव भी किया। इंस्पेक्टर ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने खुद को निर्दोष बताया और कहा कि वे नियमित चेकिंग के सिलसिले में इलाके में आए थे। उनका कहना है कि वे दुकान पर वॉशरूम जाने के लिए रुके थे।
अंदर बुलाकर उन्हें बैठाया गया और अचानक शटर बंद कर दिया गया। इंस्पेक्टर ने कहा कि वे आराम से रस मलाई खा रहे थे, तभी यह पूरा विवाद खड़ा कर दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें जानबूझकर बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए हैं।

कारोबारी गजराज चौहान का कहना है कि उनके पास कई महीनों की सीसीटीवी फुटेज और सबूत मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे वाहनों से हर महीने 6 से 8 हजार रुपये तक अवैध वसूली की जाती है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। वीडियो फुटेज और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की भी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि रिश्वतखोरी के आरोपों में कितनी सच्चाई है। यह घटना परिवहन विभाग में कथित भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है।
