देहरादून।
नर्सिंग अभ्यर्थियों की वर्षवार भर्ती की मांग को लेकर महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला समेत पांच प्रदर्शनकारियों ने परेड ग्राउंड स्थित पानी की टंकी पर चढ़कर 34 घंटे से अधिक समय तक आंदोलन किया। प्रदर्शनकारियों ने खुद पर पेट्रोल छिड़क दिया और सरकार से लिखित आश्वासन न मिलने तक टंकी से नीचे न उतरने की चेतावनी दी।

आंदोलन के दौरान ज्योति रौतेला और अन्य प्रदर्शनकारियों की तबीयत बिगड़ने लगी थी, लेकिन वे अपने रुख पर अडिग रहे। प्रदर्शनकारियों ने सुसाइड की चेतावनी भी दी।इससे पहले नर्सिंग एकता मंच के अध्यक्ष नवल किशोर पुंडीर के नेतृत्व में अभ्यर्थी स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से मिलने पहुंचे थे, लेकिन बातचीत बेनतीजा रही। प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत भी मौके पर पहुंचे।
सामाजिक कार्यकर्ता बॉबी पंवार ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हस्तक्षेप करने की मांग की।नर्सिंग अभ्यर्थी पिछले 159 दिनों से देहरादून के एकता विहार में धरना दे रहे थे। कल वे परेड ग्राउंड पहुंचे और पानी की टंकी पर चढ़ गए। आंदोलनकारियों का दावा है कि पिछले 23-24 दिनों से वे आमरण अनशन पर हैं। अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि प्रदेश में खाली पड़े 3 से 4 हजार नर्सिंग पदों पर वर्षवार भर्ती की जाए। उनका आरोप है कि सरकार केवल मौखिक आश्वासन दे रही है, जबकि उन्हें लिखित गारंटी चाहिए।

आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में नर्सिंग अभ्यर्थी, खासकर महिलाएं और युवतियां अपने छोटे बच्चों के साथ सड़क पर लेट गए और परेड ग्राउंड के बाहर चक्का जाम कर दिया। इससे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। घंटाघर समेत कई इलाकों में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह और एसपी सिटी प्रमोद कुमार लगातार प्रदर्शनकारियों को समझाने में जुटे रहे। देर रात डीजी हेल्थ सुनीता टम्टा भी परेड ग्राउंड पहुंचीं।
उन्होंने नर्सिंग एकता मंच के अध्यक्ष नवल किशोर पुंडीर से बातचीत की और टंकी पर बैठीं ज्योति रौतेला से फोन पर आंदोलन खत्म करने की अपील की। फिलहाल सड़क से जाम हटा दिया गया है, लेकिन धरना जारी है और पानी की टंकी पर चढ़े प्रदर्शनकारी अब भी डटे हुए हैं। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर वे और कठोर कदम उठाने को मजबूर हो सकते हैं। मुख्य मांगें
- 2020 में घोषित लगभग 3 हजार नर्सिंग पदों की भर्ती पूरी की जाए।
- वर्षवार भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
- लिखित आश्वासन दिया जाए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भर्ती में हो रही देरी से कई अभ्यर्थी ओवरएज हो चुके हैं और उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और बातचीत जारी है।
