देहरादून।
देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि का उत्तराखंड और गढ़वाल राइफल्स से विशेष लगाव रहा है। करीब चार दशक तक गढ़वाल राइफल्स से जुड़े रहने के कारण वे पहाड़ की संस्कृति, परिस्थितियों और यहां के सैनिकों से गहराई से जुड़े रहे। वे जवानों से गढ़वाली भाषा में बातचीत भी किया करते थे।

30 मई 2026 को अपना कार्यभार संभालने जा रहे जनरल सुब्रमणि ने उत्तराखंड के सैनिकों और पूर्व सैनिकों के हितों के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कीं। इनमें देहरादून के डोईवाला में आर्मी कैंटीन का काउंटर खुलवाना और दून तथा कोटद्वार में युद्ध विधवाओं के बच्चों के लिए स्कूल शुरू कराने जैसी पहल शामिल हैं।रुड़की निवासी रिटायर्ड सूबेदार आरपी भट्ट ने बताया कि 2004-2006 के दौरान असम के भूटान बॉर्डर क्षेत्र में तैनाती के समय वे मेजर जनरल सुब्रमणि के साथ रहे।
कमांडिंग ऑफिसर होने के बावजूद वे जवानों के साथ पैदल पेट्रोलिंग पर जाते थे। जंगलों में ऑपरेशन के दौरान जवानों के शरीर पर चिपकी जोंकों को वे खुद नमक डालकर हटाया करते थे।सूबेदार भट्ट के अनुसार पिछले सितंबर में भी जब वे वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ थे, तब देहरादून आए और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा पूर्व सैनिकों से मुलाकात कर युवाओं की सेना भर्ती और पूर्व सैनिकों की समस्याओं पर चर्चा की। वे जब भी देहरादून आते, सैनिक परिवारों और पूर्व सैनिकों से अवश्य मिलते थे।

जनरल सुब्रमणि को 14 दिसंबर 1985 को गढ़वाल राइफल्स की 8वीं बटालियन में कमीशन मिला था। बाद में उन्होंने 16 गढ़वाल राइफल्स की कमान संभाली। उन्होंने असम में ऑपरेशन राइनो के दौरान आतंकवाद विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1 जुलाई 2024 से 31 जुलाई 2025 तक वे थल सेना के उप-प्रमुख रहे।उत्तराखंड के सैनिक परिवारों और पूर्व सैनिकों में नए सीडीएस के प्रति विशेष अपनापन देखा जा रहा है।
