देहरादून।
प्रदेश में फ्लैट बेचकर परियोजनाएं अधूरी छोड़ भाग जाने वाले बिल्डरों पर अब सख्ती बढ़ाई जा रही है। उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने हर रियल एस्टेट परियोजना को अनिवार्य बीमा कवर प्रदान करने का प्रस्ताव तैयार किया है, ताकि बिल्डर फरार होने, परियोजना अधूरी छोड़ने या दिवालिया होने की स्थिति में खरीदारों की रकम सुरक्षित रहे।रेरा स्तर पर बीमा कंपनियों के साथ लगातार चर्चा चल रही है।

प्रस्तावित मॉडल में बिल्डर के फरार हो जाने, वित्तीय अनियमितता या परियोजना बंद होने पर बीमा कंपनी खरीदारों को सुरक्षा मुहैया कराएगी। यह प्रस्ताव अगली बोर्ड बैठक में रखा जा सकता है। यदि लागू हुआ तो उत्तराखंड में बिल्डरों को सिर्फ नक्शा और विज्ञापन नहीं, बल्कि खरीदारों की रकम की गारंटी भी देनी होगी।रेरा के नए अध्यक्ष नरेश सी. मठपाल के नेतृत्व में यह कदम उन खरीदारों की शिकायतों के बाद उठाया जा रहा है जिन्हें वर्षों से परियोजनाओं में कब्जा नहीं मिल पा रहा है या बिल्डर गायब हो गए हैं।
देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और हल्द्वानी जैसे शहरों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं।इसके अलावा हर परियोजना के लिए रिजर्व सेफ्टी फंड बनाने का भी प्रस्ताव है, जिसमें खरीदारों से प्राप्त राशि का एक हिस्सा अलग खाते में जमा रहेगा। परियोजना पूरी होने के पांच वर्ष बाद तक प्रमोटर इस फंड से राशि नहीं निकाल सकेंगे। एस्क्रो अकाउंट व्यवस्था को भी और सख्त किया जाएगा, जिसमें खरीदारों की 70 प्रतिशत राशि सीधे नियंत्रित खाते में जाएगी और निर्माण प्रगति के अनुसार ही पैसा निकाला जा सकेगा।

रेरा अब परियोजनाओं की अवधि बढ़ाने या पंजीकरण संशोधन के लिए भी पारदर्शी प्रक्रिया अपनाएगा। ऐसे आवेदनों पर सार्वजनिक सूचना जारी कर खरीदारों से आपत्तियां मांगी जाएंगी। पर्वतीय क्षेत्रों में अवैध रियल एस्टेट कारोबार पर भी विशेष नजर रखी जाएगी।रेरा सूत्रों का कहना है कि घर खरीदना जीवन भर की पूंजी का फैसला होता है, इसलिए खरीदारों को अब बाजार के भरोसे नहीं छोड़ा जाएगा। इन प्रस्तावित सुधारों से उत्तराखंड का रियल एस्टेट सेक्टर अधिक पारदर्शी और खरीदार-अनुकूल बनने की उम्मीद है।
