श्रीनगर गढ़वाल।
चारधाम यात्रा इस बार पूरे जोरों पर है। देशभर से लाखों श्रद्धालु बाबा केदार और भगवान बदरीनाथ के दर्शन के लिए उत्तराखंड पहुंच रहे हैं। यात्रा मार्ग पर स्थित श्रीनगर शहर से प्रतिदिन हजारों यात्री गुजर रहे हैं, लेकिन इस बार स्थानीय व्यापारी मायूस नजर आ रहे हैं। कारण यह है कि श्रद्धालु श्रीनगर में रुकने के बजाय सीधे अपने गंतव्य धामों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे शहर के होटल, रेस्टोरेंट, दुकानों और अन्य कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा है।

व्यापारियों का कहना है कि हर वर्ष चारधाम यात्रा का सीजन उनके लिए अच्छी आमदनी का मौका लेकर आता था, लेकिन इस बार लगातार हो रहे ट्रैफिक जाम और वाहनों को अधिक देर तक रुकने न देने की व्यवस्था के कारण यात्री शहर में ठहर नहीं पा रहे हैं। इससे न केवल व्यापार प्रभावित हो रहा है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंच रहा है।इसी समस्या को गंभीरता से लेते हुए श्रीनगर नगर निगम की महापौर आरती भंडारी ने उपजिलाधिकारी श्रीनगर को पत्र लिखकर एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है।
उन्होंने कहा कि बदरीनाथ, केदारनाथ, सोनप्रयाग और गौरीकुंड जैसे संवेदनशील पड़ावों पर यात्रियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यात्रा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए श्रद्धालुओं को श्रीनगर में भी रोका जा सकता है। महापौर ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि श्रीनगर चारधाम यात्रा का ऐतिहासिक और प्रमुख पड़ाव रहा है। यहां यात्रियों के लिए होटल, पार्किंग और अन्य मूलभूत सुविधाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
यदि यात्रियों को श्रीनगर में रुकने के लिए प्रोत्साहित किया जाए तो इससे एक ओर मुख्य धामों और संवेदनशील पड़ावों पर बढ़ता दबाव कम होगा, वहीं यात्रियों की यात्रा भी अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित हो सकेगी। आरती भंडारी ने यह भी कहा कि श्रीनगर केवल एक ट्रांजिट पॉइंट नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का नगर है।

यहां स्थित मां धारी देवी मंदिर और कमलेश्वर मंदिर जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के दर्शन का अवसर भी श्रद्धालुओं को मिल सकेगा। इससे श्रीनगर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय व्यापारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। मेयर की इस पहल को स्थानीय व्यापारी वर्ग ने सकारात्मक कदम बताया है। व्यापारियों का कहना है कि यदि प्रशासन श्रीनगर को व्यवस्थित पड़ाव के रूप में विकसित करता है तो इससे न केवल चारधाम यात्रा प्रबंधन को मजबूती मिलेगी, बल्कि श्रीनगर को पर्यटन नगरी के रूप में नई पहचान भी मिल सकती है।
