श्रीनगर गढ़वाल। न्यायिक प्रणाली में लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में श्रीनगर न्यायालय ने एक ठोस और दूरदर्शी रणनीति तैयार की है। उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के जुलाई 2026 के ‘प्लान ऑफ एक्शन’ और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पौड़ी गढ़वाल के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में आज दोपहर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) विश्रामगृह में एक समन्वय बैठक आयोजित की गई। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) एवं अध्यक्ष तहसील विधिक सेवा समिति कुमारी अलका की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जहां एक ओर आगामी 18 जुलाई को प्रस्तावित ‘स्पेशल लोक अदालत’ की रूपरेखा तैयार की गई, वहीं दूसरी ओर 16 जुलाई को हरेला पर्व पर वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाने का संकल्प लिया गया।

बैठक के दौरान न्यायिक अधिकारियों, प्रशासनिक अमले और बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के बीच गहन मंथन हुआ। 18 जुलाई को आयोजित होने वाली स्पेशल लोक अदालत में विशेष रूप से परक्राम्य लिखत अधिनियम (Section 138 NI Act) यानी चेक बाउंस से जुड़े वादों के अधिकतम निस्तारण पर जोर दिया गया। कानूनी जानकारों की मानें तो 138 NI Act के मामले केवल वित्तीय लेन-देन तक सीमित नहीं होते, बल्कि इनका सीधा असर व्यापारिक विश्वास और सामाजिक रिश्तों पर पड़ता है। इन मामलों का समयबद्ध और आपसी समझौते के आधार पर निस्तारण न केवल वादियों को त्वरित राहत देगा, बल्कि उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालयों पर पड़ रहे दबाव को भी काफी हद तक कम करेगा। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि वादकारों को लोक अदालत के लाभों और समझौते की प्रक्रिया से पहले ही अवगत करा दिया जाए, ताकि 18 जुलाई को अधिक से अधिक मामलों का पटाक्षेप हो सके और पीड़ित पक्ष को बिना लंबी कानूनी लड़ाई के न्याय मिल सके।

न्यायिक सक्रियता के साथ-साथ बैठक में पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी गहरी संवेदनशीलता देखने को मिली। उत्तराखंड की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय पहचान ‘हरेला पर्व’ के उपलक्ष्य में 16 जुलाई को न्यायालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया। इसका मूल उद्देश्य केवल पौधे लगाना भर नहीं है, बल्कि यह संदेश देना है कि जब पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, तो जीविकोपार्जन के साधन बने रहेंगे और पलायन या संसाधनों की कमी को लेकर होने वाले विवादों में स्वतः ही कमी आएगी। कुल मिलाकर, श्रीनगर न्यायालय की यह पहल केवल एक ‘प्लान ऑफ एक्शन’ का अनुपालन भर नहीं है, बल्कि यह न्याय, पर्यावरण और सामुदायिक भागीदारी के एक सशक्त त्रिकोण का निर्माण कर रही है, जिसके सकारात्मक और दूरगामी परिणाम आने वाले समय में पर्यावरणीय, न्यायिक और सामाजिक समरसता को प्रतिबिंबित करेंगे।
पैरा लीगल वालंटियर्स (PLVs) को जमीनी स्तर पर जनजागरूकता फैलाने की कमान दी गई है। पीएलवी सदस्य मानव बिष्ट, प्रकाश नेगी, प्रीति बिष्ट, रोशनी देवी, पूनम हटवाल और प्रियंका रॉय सुदूर गांवों तक पहुंचकर लोगों को लोक अदालत के फायदे और हरेला पर्व के महत्व से जोड़ेंगे। इसके अलावा, वन विभाग के कर्मचारियों को भी वृक्षारोपण कार्यक्रम में तकनीकी सहयोग और पौधों के दीर्घकालिक रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में न्यायिक प्रक्रिया को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए प्रशासन और पुलिस का भी भरपूर सहयोग सुनिश्चित किया गया। बैठक में संरक्षक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप श्री पांथरी, बार एसोसिएशन अध्यक्ष परमेश चंद्र जोशी, महासचिव ब्रह्मानंद भट्ट, पूर्व उपाध्यक्ष विवेक जोशी, सुबोध भट्ट, बलबीर सिंह रौतेला और राखी रॉय, तहसीलदार दीपक सिंह भंडारी और कोतवाली श्रीनगर के प्रभारी निरीक्षक कुलदीप सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे।
