हल्द्वानी।
विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची को और अधिक शुद्ध और विश्वसनीय बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। अब यदि बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) मतदाताओं के घर पहुंचकर उन्हें बंद पाते हैं तो वह बाहर एक स्टीकर चिपका देंगे।

इस स्टीकर पर बीएलओ का नाम, मोबाइल नंबर और वह किस तारीख को घर आए थे, यह जानकारी होगी। साथ ही अगली बार किस तारीख को वह घर आएंगे, यह भी लिखा जाएगा। निर्वाचन आयोग की पूरी कोशिश है कि किसी भी पात्र मतदाता को इस प्रक्रिया से वंचित न रखा जाए। इसके अलावा घर बंद मिलने पर बीएलओ फार्म को दरवाजे से अंदर खिसका देंगे, ताकि मतदाता के घर पहुंचने पर उसे फार्म मिल जाए।
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले एसआईआर का दौर शुरू होने वाला है। सबसे अहम प्रक्रिया डोर टू डोर सर्वे के माध्यम से फार्म भरवाने की है। हर वोटर को दो फार्म भरने होंगे। एक बीएलओ को देना होगा और दूसरा प्रमाण के तौर पर उसके पास रहेगा। 8 जून से 7 जुलाई तक बीएलओ घर-घर फार्म लेकर पहुंचेंगे। हर विधानसभा में बूथों की संख्या के आधार पर बीएलओ की नियुक्ति की गई है।
वोटर की तलाश में कार्मिक तीन बार घर आएंगे। पहली बार घर पहुंचने पर कोई नहीं मिला तो फार्म को गेट या दरवाजे से अंदर डाल दिया जाएगा। जाते समय बीएलओ घर के बाहर स्टीकर चिपकाकर बताएगा कि वह कब आया था और आगे किस दिन आएगा। मोबाइल नंबर और नाम लिखने की वजह से घर पहुंचने पर वोटरों को भी संपर्क करने में दिक्कत नहीं आएगी।
हल्द्वानी विधानसभा के रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एपी वाजपेयी ने बताया कि सभी बीएलओ को निर्देश है कि बंद घरों में तीन बार जाना होगा, ताकि वोटर से संपर्क हो सके। स्कूलों में अवकाश और बढ़ते पारे की वजह से हर साल जून में हल्द्वानी में रहने वाले कई परिवार गांव (पहाड़) चले जाते हैं। इसके अलावा कई जगहों पर पति-पत्नी दोनों के नौकरीपेशा होने या किसी कारोबार से जुड़े होने के कारण यह समस्या पैदा हो सकती है।
इसलिए बीएलओ को तीन बार घर जाना होगा। यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि कोई भी मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया से वंचित न रहे। निर्वाचन आयोग की यह पहल मतदाता सूची को और अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच यह विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान मतदाताओं की सूची को शुद्ध करने में मददगार साबित होगा।
