Nepal Ki Yamuna Dhakal Cycle Par Vishwa Bhraman Kar Rahi Hain

नेपाल की यमुना ढकाल साइकिल पर विश्व भ्रमण कर रही हैं, हिमालय संरक्षण का संदेश देती श्रीनगर पहुंची

श्रीनगर गढ़वाल (पौड़ी)।

नेपाल की 36 वर्षीय यमुना ढकाल साइकिल पर विश्व भ्रमण का सफर तय कर रही हैं। इस दौरान वे हिमालय की पर्यावरणीय सुरक्षा और चारधाम यात्रा मार्गों को प्लास्टिक मुक्त बनाने का संदेश दे रही हैं। नेपाल के लुंबिनी से अपनी यात्रा शुरू करने वाली यमुना अब तक भारत में 3,100 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुकी हैं। वह बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के दर्शन कर श्रीनगर पहुंची हैं। अगले तीन दिनों में वह हरिद्वार पहुंचेंगी और वहां से बरेली होते हुए नेपाल लौट जाएंगी।

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इसके बाद उनका अगला पड़ाव थाईलैंड होगा।यमुना ढकाल कहती हैं कि आस्था और भक्ति के साथ हमें चारधाम तथा हिमालय को प्लास्टिक कचरे से भी मुक्त करना होगा। पैदल मार्गों और धामों पर बेहतर प्रबंधन की जरूरत है, ताकि श्रद्धालु आराध्य के दर्शन कर सकें और देवभूमि की पवित्रता भी बनी रहे। उन्होंने केदारनाथ पैदल मार्ग पर हर सौ-सौ मीटर पर कूड़ेदान लगाने का सुझाव दिया। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने पीपलकोटी में पौधारोपण भी किया।36 वर्षीय यमुना ने इंटरमीडिएट तक शिक्षा प्राप्त की है और वीडियोग्राफी के क्षेत्र में भी काम कर चुकी हैं। बचपन से ही उन्हें साइकिल से यात्रा करने का शौक रहा है।

उन्होंने नेपाल में 1,200 किलोमीटर की साइकिल यात्रा पहले ही पूरी कर ली है। इसी प्रेरणा से उन्होंने विश्व भ्रमण की योजना बनाई और 7 फरवरी को लुंबिनी से साइकिल पर भारत की ओर रवाना हुईं।नेपाल से बाघा बॉर्डर होते हुए उन्होंने अयोध्या, मथुरा, दिल्ली, पलवल, अमृतसर मार्ग से यात्रा की। बदरीनाथ-केदारनाथ होते हुए देवप्रयाग तक उन्होंने 3,100 किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर लिया है।यमुना ढकाल ने पतंजलि हरिद्वार में 10 दिवसीय सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग भी ली। उन्होंने बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण से योग व आत्मरक्षा के गुर सीखे। यमुना ने भारत को बेटियों के लिए सुरक्षित देश बताया।

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उन्होंने कहा कि तीन महीने की यात्रा के दौरान कई बार उन्हें देर रात तक सफर करना पड़ा, लेकिन कभी कोई परेशानी नहीं हुई। लोग मददगार रहे और हर जगह उनका सम्मान किया गया। उन्होंने अपनी यात्रा के अनुभव रोजाना वीडियो कॉल के जरिए अपनी मां भूमिका ढकाल को बताए।यमुना ने पाकिस्तान जाने की कोशिश भी की, लेकिन वीजा नहीं मिला। नेपाल के राजदूत ने पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के चलते उन्हें पाकिस्तान न जाने की सलाह दी थी।यमुना ढकाल की यह यात्रा पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का अनुपम उदाहरण बनती दिख रही है।

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