पिथौरागढ़।
17 हजार फीट से अधिक ऊंचाई वाले लिपुलेख दर्रे से छह साल के अंतराल के बाद भारत-चीन के बीच सीमा व्यापार फिर से शुरू होने जा रहा है। केंद्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। वर्ष 1992 से शुरू हुए इस पारंपरिक सीमा व्यापार को वर्ष 2019 में कोरोना महामारी और उसके बाद सीमा पर उत्पन्न तनाव के कारण रोका गया था।

अब विदेश मंत्रालय की हरी झंडी मिलने के बाद जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई ने विभिन्न विभागों के साथ समीक्षा बैठक कर सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।सीमांत व्यापार संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंकली और महासचिव दौलत सिंह रायता ने बताया कि छह वर्ष बाद व्यापार शुरू होने से स्थानीय व्यापारियों में खुशी का माहौल है।

इस बार व्यापार के लिए घोड़े-खच्चरों के अलावा वर्ष 2020 में बनी मोटर मार्ग का भी उपयोग हो सकेगा, जिससे माल ढुलाई का खर्च और समय दोनों कम होने की उम्मीद है।व्यापार जून माह से शुरू होने की संभावना है, लेकिन अभी तक सटीक तिथि घोषित नहीं होने से व्यापारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। व्यापार शुरू होने में अब एक महीने से भी कम समय शेष रह गया है।
आयात-निर्यात की मुख्य वस्तुएं
निर्यात में कपड़ा, मसाले, गुड़ और कृषि उपकरण शामिल हैं, जबकि आयात में मुख्य रूप से जैकेट, तिब्बती जूते, पश्मीना, नमक और छिरबी आदि आते हैं। इस वर्ष की आयात-निर्यात सूची भी शीघ्र जारी होने वाली है।व्यापारियों की प्रमुख मांगें
- तकलाकोट (तिब्बत) में व्यापार मंडी का स्थान बदल गया है। भारतीय व्यापारियों को पहले की तरह दुकान और गोदाम रियायती दर पर उपलब्ध कराए जाएं।
- व्यापार अवधि को जून से 31 अक्टूबर के बजाय 30 नवंबर तक बढ़ाया जाए।
- चीन से आयातित घोड़ों-भेड़-बकरियों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए गुंजी में क्वारंटाइन सुविधा स्थापित की जाए।
- कस्टम और आव्रजन विभाग में तैनाती की जाए।
- लिपुलेख दर्रे के पास पैदल मार्ग पर सामान ढुलाई की व्यवस्था की जाए।
- मानसून और हिमपात के दौरान मार्ग खोलने के लिए जरूरी मशीनरी और कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई के निर्देश पर सभी संबंधित विभाग सक्रियता से तैयारियों में जुटे हुए हैं। लिपुलेख व्यापार के पुनः शुरू होने से पिथौरागढ़ के सीमांत क्षेत्र के अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।
