श्रीनगर गढ़वाल। शहरी निकायों के लिए स्वच्छता शुल्क (यूजर चार्जेज) की वसूली हमेशा एक चुनौतीपूर्ण और विवादित कार्य रहा है, लेकिन श्रीनगर गढ़वाल में इस पुरानी परिपाटी को तोड़ते हुए एक नई और क्रांतिकारी पहल की गई है। नगर निगम ने अब कर वसूली की कमान सीधे तौर पर महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) के हाथों में सौंप दी है। यह फैसला केवल निगम के खजाने को भरने या राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने की एक कवायद नहीं है, बल्कि स्थानीय महिलाओं को आर्थिक आजादी और शहरी प्रशासन में सीधी भागीदारी का एक सशक्त मॉडल है।

इस नई व्यवस्था को जमीन पर उतारने के लिए नगर निगम सभागार का नजारा किसी पारंपरिक सरकारी बैठक से बिल्कुल अलग था। यहां कुर्सियों पर फाइलों के बीच उलझे सरकारी अफसर नहीं, बल्कि ‘शक्ति धाम’, ‘भवानी’, ‘शिवशक्ति’ और ‘दुर्गा’ जैसे विभिन्न स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं बैठी थीं, जो अब शहर की ‘राजस्व संग्रहकर्ता’ बनने जा रही हैं। इन महिलाओं को यूजर चार्जेज संग्रहण की बारीकियां, अभिलेखों का संधारण, बही-खाता तैयार करना और आम नागरिकों से समन्वय स्थापित करने के तरीकों का गहन प्रशिक्षण दिया गया।
इस नए मॉडल को लागू करने के लिए ऋषिकेश नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त चंद्रकांत भट्ट को विशेष प्रशिक्षक के तौर पर बुलाया गया। उन्होंने महिलाओं को कर वसूली की पूरी कार्यप्रणाली और इसके व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया। प्रशासनिक और सामाजिक नजरिए से देखा जाए तो महिलाओं की यह भागीदारी ‘दोहरे लाभ का सौदा’ है। एक तरफ जहां महिलाओं के नेतृत्व में कर वसूली के दौरान नागरिकों के साथ टकराव या विवाद की संभावनाएं न के बराबर हो जाती हैं, वहीं दूसरी ओर राजस्व संग्रहण में पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ती है।
महापौर आरती भंडारी ने इस पहल को शहरी शासन (Urban Governance) में एक बड़े बदलाव की संज्ञा दी है। उनका स्पष्ट मानना है कि स्वच्छ एवं समृद्ध नगर की आधारशिला सशक्त महिलाओं के हाथों से ही रखी जाती है। उन्होंने प्रशासनिक गलियारों में यह स्पष्ट संदेश दिया है कि निगम का उद्देश्य केवल सड़कें साफ करना या कचरा उठाना नहीं है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर उन्हें विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बनाना है। महापौर ने भरोसा दिलाया कि स्वयं सहायता समूहों को यह जिम्मेदारी देकर आत्मनिर्भरता की जो नींव रखी गई है, उसे भविष्य में अन्य रोजगारपरक योजनाओं से और विस्तार दिया जाएगा।
कार्यशाला के दौरान नगर आयुक्त नुपुर वर्मा, सहायक नगर आयुक्त रविराज बंगारी और मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक शशि पंवार सहित निगम के तमाम अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे, जिन्होंने महिलाओं को हर संभव प्रशासनिक सहयोग और सुरक्षा का आश्वासन दिया। अब देखना यह होगा कि जब ये महिलाएं रसीद बुक लेकर शहर की गलियों और मोहल्लों में निकलेंगी, तो श्रीनगर निगम की इस पहल का जनता द्वारा कितना बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है।
