पौड़ी गढ़वाल । विकास भवन सभागार में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ने जिला प्रशासन के कामकाजी रवैये को बदलने का स्पष्ट संकेत दे दिया है। संस्कृत शिक्षा, जनगणना एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग के सचिव दीपक कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में केवल योजनाओं की फाइलें नहीं खोली गईं, बल्कि जमीन पर उनका असर कैसे दिखे, इसको लेकर एक कड़ा और स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया। सचिव ने साफ तौर पर अफसरों को समझाया कि शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता अब केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि नवाचारी माध्यमों से उनका लाभ गांव के आखिरी छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसके लिए उन्होंने सभी विभागों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और परिणामपरक कार्यप्रणाली अपनाने का सख्त निर्देश दिया।

बैठक का सबसे चर्चित और ऐतिहासिक पहलू प्रशासनिक संस्कृति और जमीनी जुड़ाव को लेकर सामने आया। सचिव ने सभी सरकारी कार्यालयों के नामपट्ट पर संस्कृत भाषा को भी अनिवार्य रूप से अंकित कराने का फरमान सुनाया, जो सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। लेकिन इससे भी ज्यादा कड़ा संदेश गांवों की वास्तविक स्थिति को लेकर था। अफसरों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि जब भी वे जनता दरबार या चौपाल के लिए गांवों का दौरा करें, तो दिन में लौटने के बजाय वहीं रात्रि विश्राम करें। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि गांव की असली समस्याएं और जमीनी हकीकत दिन की चमक में नहीं, बल्कि रात के अंधेरे और ग्रामीणों के बीच बैठकर ही समझी जा सकती है। इसके साथ ही अधीनस्थ कार्यालयों के नियमित और बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया आयाम देने के लिए बैठक में ‘एकीकृत कृषि मॉडल’ की नींव रखी गई। सचिव ने कृषि, उद्यान, डेयरी, जलागम और मत्स्य विभागों को अलग-अलग काम करने के बजाय मिलकर एक समन्वित मॉडल तैयार करने को कहा। इसके लिए सख्त समयसीमा तय की गई है कि जुलाई तक तीन विकासखंडों में इसका पायलट प्रोजेक्ट तैयार हो और सितंबर तक इसे जनपद के सभी विकासखंडों में लागू कर दिया जाए। बीज वितरण, कृषि यंत्रों और किसानों के प्रशिक्षण की बारीकी से समीक्षा करते हुए वन पंचायतों को भी खेतों की घेराबंदी और संरक्षण जैसे कार्यों में सक्रिय भागीदार बनाने के निर्देश दिए गए।
महिला सशक्तिकरण और पर्यटन के मोर्चे पर भी बड़े फैसले लिए गए। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत जनपद के टॉप-10 स्वयं सहायता समूहों की पहचान कर ‘लखपति दीदी’ के रूप में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित करने की तैयारी है। पर्यटन की दृष्टि से सतपुली झील परियोजना को शीघ्र पूरा करने और स्यूंसी झील को उसी भव्यता के साथ विकसित करने का खाका खींचा गया। होमस्टे और होटल व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए बैंकों से समन्वय स्थापित कर लंबित सब्सिडी प्रकरणों का तुरंत निस्तारण करने को कहा गया, ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें।
स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे की समीक्षा के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत शिशु मृत्यु दर (आईएमआर), मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) और टीबी मुक्त अभियान के आंकड़ों पर गहन मंथन हुआ। भू-धारा (लैंड होल्डिंग) के सरलीकरण, कीवी, सेब और ड्रैगन फ्रूट मिशन, मत्स्य पालन, पीएमजीएसवाई, लोक निर्माण और सिंचाई विभाग की योजनाओं की प्रगति का जायजा लेते हुए सचिव ने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार अब पारंपरिक तरीकों से नहीं, बल्कि नवाचारी और डिजिटल माध्यमों से होना चाहिए।
आज के डिजिटल दौर में बढ़ते साइबर अपराधों और नशे के कारोबार पर सचिव ने गहरी चिंता व्यक्त की। साइबर फ्रॉड से बचाव के लिए ‘1930’ हेल्पलाइन का व्यापक प्रचार-प्रसार करने, स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने और अफसरों को स्वयं साइबर सुरक्षा का प्रशिक्षण लेने के निर्देश दिए। इसके अलावा, अन्य राज्यों से हो रही नशीली दवाओं और मादक पदार्थों की तस्करी पर लगाम कसने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर सघन जांच अभियान चलाने और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का फरमान सुनाया गया।
इस महत्वपूर्ण और दिशा-निर्देशक बैठक में जिला प्रशासन के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे। मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी, अपर जिलाधिकारी एफ.आर. चौहान, पीडी डीआरडीए विवेक कुमार उपाध्याय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिवमोहन शुक्ला, सीओ तपेश कुमार चंद, डीएसटीओ राम सलोने, सहायक निदेशक संस्कृत मनोज कुमार सिमल्टी, जिला शिक्षाधिकारी रणजीत सिंह नेगी, मुख्य कृषि अधिकारी ऋतु कुकरेती जुयाल, अधिशासी अभियंता जल संस्थान टी.एस. रावत, जल निगम के नवनीत कटारिया, विद्युत विभाग के अभिनव रावत, पीएमजीएसवाई के परशुराम चमोली, सिंचाई के सचिन शर्मा और प्रभारी मत्स्य अधिकारी अभिषेक मिश्रा सहित विभिन्न विभागों के प्रमुखों ने अपनी-अपनी विभागों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। कुल मिलाकर, यह बैठक केवल एक समीक्षा भर नहीं थी, बल्कि जिला प्रशासन को एक नई कार्यसंस्कृति और जवाबदेही की ओर ले जाने का एक सशक्त प्रयास थी।
