श्रीनगर गढ़वाल। अलकनंदा के तट पर बसे गढ़वाल के इस शैक्षिक और सांस्कृतिक केंद्र में अब भविष्य की तकनीक की दस्तक हो चुकी है। पहाड़ी इलाकों में बढ़ते कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच नगर निगम श्रीनगर गढ़वाल ने हरित ऊर्जा और आधुनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक रणनीतिक और दूरदर्शी कदम उठाया है। शहर के प्रमुख शैक्षणिक केंद्र एनआईटी (NIT) के समीप इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग स्टेशन के निर्माण कार्य का शुभारंभ हो चुका है। यह परियोजना केवल एक सिविल वर्क नहीं है, बल्कि चारधाम यात्रा मार्ग पर स्थित इस प्रमुख शहर को ‘ग्रीन सिटी’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।

जमीनी हकीकत और निर्माण की गुणवत्ता का जायजा लेने के लिए नगर निगम की महापौर आरती भंडारी स्वयं निर्माण स्थल पर पहुंचीं। ठेकेदार और अभियंताओं के साथ उन्होंने साइट का बारीकी से निरीक्षण किया। चूंकि ईवी चार्जिंग स्टेशनों में हाई-वोल्टेज तकनीक और सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत अनिवार्य होता है, इसलिए महापौर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता न किया जाए। उन्होंने कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हुए इसे निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने का सख्त टारगेट दिया, ताकि जल्द से जल्द इलेक्ट्रिक वाहन चालकों को तेज और सुविधाजनक चार्जिंग की सुविधा मिल सके।

पहाड़ी भूगोल और संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को देखते हुए इस पहल का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। श्रीनगर में देश-विदेश से हजारों छात्र, पर्यटक और श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में पारंपरिक ईंधन से चलने वाले वाहनों का दबाव शहर की हवा और पर्यावरण पर पड़ता है। महापौर आरती भंडारी ने इस जरूरत को रेखांकित करते हुए कहा कि भविष्य पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों का है। जब तक जमीनी स्तर पर मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा नहीं होगा, तब तक ई-मोबिलिटी का सपना अधूरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परियोजना आम लोगों की ‘रेंज एंजायटी’ (Range Anxiety) को खत्म करने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी लाएगी, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी जीत होगी।
प्रशासनिक स्तर पर इस परियोजना को लेकर गंभीरता साफ झलक रही है। महापौर ने कहा कि नगर निगम श्रीनगर हरित ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार और ठोस कार्य कर रहा है। हमारा विजन केवल सड़कें बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर को स्वच्छ, आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। इसी कड़ी में एनआईटी जैसे हाई-प्रोफाइल क्षेत्र को चुना गया है, जहां छात्रों, फैकल्टी और आने-जाने वाले पर्यटकों की आवाजाही सर्वाधिक रहती है।
निरीक्षण के दौरान निगम के वरिष्ठ पार्षद दिनेश पटवाल भी मौजूद रहे, जिन्होंने स्थानीय स्तर पर आ रही बाधाओं को दूर करने और निर्माण कार्य को सुचारू रखने में समन्वयक की भूमिका निभाई। स्थानीय नागरिकों, दुकानदारों और एनआईटी के छात्रों ने भी इस पहल का खुले दिल से स्वागत किया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस स्टेशन के शुरू होने से शहर की पहचान बदलेगी और ई-वाहनों के मालिकों को बिना किसी परेशानी के लंबी यात्रा तय करने में मदद मिलेगी।
ई-वाहनों के बढ़ते दौर में जहां कई पहाड़ी शहर बुनियादी ढांचे की कमी के कारण पिछड़ रहे हैं, वहीं श्रीनगर गढ़वाल का यह कदम अन्य नगर निकायों के लिए एक मिसाल पेश करता है। यह चार्जिंग स्टेशन न केवल शहर को एक नई और प्रगतिशील पहचान देगा, बल्कि उत्तराखंड को एक स्वच्छ और सतत विकास वाले ‘ग्रीन स्टेट’ के रूप में आगे बढ़ाने में भी अपनी अहम भूमिका निभाएगा।
