बागेश्वर।
जिले के छात्र-छात्राओं को भारतीय भाषाओं और स्थानीय कुमाऊंनी संस्कृति से जोड़ने के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विद्यार्थियों ने हिंदी, संस्कृत और कुमाऊंनी भाषा के साथ-साथ स्थानीय लोक संस्कृति की जानकारी प्राप्त की।

कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों में संवाद कौशल विकसित करना और उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना था। प्रशिक्षकों ने भाषा सीखने के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि सही संवाद न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए जरूरी है बल्कि सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने में भी मदद करता है। विद्यार्थियों ने कार्यशाला में सक्रिय भागीदारी दिखाई। उन्होंने विभिन्न भाषाओं के शब्दों, वाक्यों और स्थानीय लोकगीतों को सीखा।
कुमाऊंनी संस्कृति के बारे में जानकारी देते हुए प्रशिक्षकों ने बताया कि भाषा और संस्कृति एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। कार्यशाला के अंत में छात्र-छात्राओं ने अपनी सीख को साझा किया और कहा कि इस कार्यक्रम से उन्हें अपनी जड़ों को समझने में मदद मिली है। यह पहल बागेश्वर जिले में युवाओं को सांस्कृतिक और भाषाई रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक सार्थक कदम माना जा रहा है। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस तरह के कार्यक्रमों को और बढ़ावा देने की योजना बना रहा है।
