UCC aur nakal virodhi kanoon ko bataya aitihasik

अधिवक्ता समाज ने सीएम धामी के 5 वर्षों के ‘विधायी साहस’ की सराहना की, यूसीसी और नकल विरोधी कानून को बताया ऐतिहासिक।

श्रीनगर। कानून की बारीकियों को समझने वाला विधि जगत जब किसी सरकार के कामकाज की सराहना करे, तो उसका वजन अपने आप में बहुत अधिक होता है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार के सफलतापूर्वक पांच वर्ष पूरे होने पर श्रीनगर के अधिवक्ता समाज में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड के पूर्व पदाधिकारियों से लेकर स्थानीय बार एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ताओं तक ने मुख्यमंत्री के दूरदर्शी और विकासपरक नेतृत्व की खुलकर तारीफ की है।

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कचहरी परिसर में जमा हुए विधि विशेषज्ञों ने न केवल बधाई संदेश प्रेषित किए, बल्कि सरकार द्वारा पिछले पांच वर्षों में लिए गए उन ऐतिहासिक और साहसिक फैसलों का विश्लेषण किया, जिन्होंने देवभूमि की सामाजिक और कानूनी तस्वीर बदल दी है। विधि जगत का यह विश्वास स्पष्ट संकेत देता है कि कड़े और पारदर्शी कानूनों का समर्थन करने वाला वर्ग सरकार के इन फैसलों को राज्य के भविष्य के लिए एक मजबूत नींव मान रहा है।

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इस अवसर पर आयोजित बैठक में बार एसोसिएशन के संरक्षक एवं जिला संयोजक विधि प्रकोष्ठ भाजपा अनूप श्री पांथरी और बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन सिंह भंडारी ने अधिवक्ताओं की इस पहल का नेतृत्व किया। उनके साथ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष दीपक भंडारी, महेंद्र पाल सिंह रावत, वर्तमान अध्यक्ष परमेश चंद्र जोशी, महासचिव ब्रह्मानंद भट्ट, जिला सहसंयोजक विधि प्रकोष्ठ एवं पूर्व महासचिव विकास पंत, पूर्व सह-सचिव एवं जिला सहसंयोजक प्रदीप मैठानी, सह-सचिव देवी प्रसाद खरे, पूर्व उपाध्यक्ष विवेक जोशी, कोषाध्यक्ष सुबोध भट्ट और सुनीता भंडारी सहित तमाम वरिष्ठ व कनिष्ठ अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

अधिवक्ताओं ने विशेष रूप से धामी सरकार के उन कड़े और ऐतिहासिक विधायी निर्णयों की सराहना की, जिन्हें लागू करने में अक्सर राजनीतिक संकोच देखा जाता है। विधि विशेषज्ञों ने देवभूमि के मूल स्वरूप की रक्षा के लिए उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त करने और अवैध रूप से संचालित मदरसों पर कड़ी कार्रवाई के फैसले को सराहनीय बताया। इसके अलावा, राज्य के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भर्ती परीक्षाओं में धांधली करने वालों के खिलाफ उम्रकैद और 10 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान करने वाले देश के सबसे सख्त नकल विरोधी कानून को विधि जगत ने एक मजबूत कानूनी ढाल करार दिया।

सामाजिक समरसता और न्याय के पैमाने पर अधिवक्ताओं ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के कार्यान्वयन को एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है जिसने लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए यूसीसी लागू की। इसके साथ ही, राज्य की शांति व्यवस्था को अक्षुण्ण रखने के लिए जबरन धर्म परिवर्तन और दंगा करने वालों के खिलाफ बनाए गए बेहद कठोर धर्मांतरण और दंगा रोधी कानूनों की भी कानूनी दृष्टिकोण से भरपूर प्रशंसा की गई।

कानूनों के साथ-साथ सरकार के समावेशी और रोजगारपरक कदमों ने भी अधिवक्ताओं का ध्यान आकर्षित किया। सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की कानूनी गारंटी और 34,000 से अधिक युवाओं को सरकारी रोजगार उपलब्ध कराने के आंकड़ों को रेखांकित करते हुए अधिवक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड ने राष्ट्रपटल पर एक शिक्षित और सशक्त राज्य के रूप में अपनी एक नई और गौरवपूर्ण पहचान दर्ज कराई है। बैठक में मौजूद समस्त अधिवक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मुख्यमंत्री धामी का यह पांच वर्षों का कार्यकाल सुशासन, न्याय और अंत्योदय की भावना को समर्पित रहा है।

बार एसोसिएशन श्रीनगर परिवार की ओर से बलवीर सिंह रौतेला, सुरेंद्र सिंह रौथान, ओम प्रकाश मैठानी, नितेश भारती, आनंद सिंह बुटोला, परमानंद मैठाणी, गौरव उपाध्याय, राजेश जैन, कुलदीप दानू, अनुपम गोयल, लक्ष्मीकांत, प्रेरणा काला, राखी रॉय और रतन सिंह बिष्ट सहित सभी सदस्यों ने मुख्यमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और राज्य की निरंतर प्रगति के लिए मंगलकामनाएं प्रेषित कीं।

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