पौड़ी। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली और वसूली की धीमी गति पर सख्त रुख अख्तियार किया है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय सहकारी समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कम वसूली करने वाली समितियों के सचिवों का वेतन रोकने और संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry) करने के कड़े निर्देश दिए। बैठक में सहकारी देयकों की वसूली, एमपैक्स (M-PACS) के कंप्यूटरीकरण, क्लस्टर आधारित कृषि और किसानों की आय बढ़ाने वाली योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

सहकारी देयकों की वसूली की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने न्यूनतम प्रगति वाली समितियों की स्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संबंधित समिति सचिवों से फोन पर वार्ता कर कम वसूली के कारणों की जानकारी ली और स्पष्ट किया कि कार्यप्रगति में सुधार के लिए गंभीरता से प्रयास किए जाएं। डीएम ने सहायक जिला निबंधक को कम प्रगति वाले मामलों की नियमित निगरानी करने और संबंधित सचिवों का वेतन रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वसूली में सुधार नहीं हुआ या कारण असंतोषजनक पाए गए, तो संबंधित के विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि की कार्रवाई की जाएगी।
तकनीकी उन्नयन और सेवा विस्तार पर जोर देते हुए जिलाधिकारी ने सितंबर माह के अंत तक एमपैक्स समितियों के कंप्यूटरीकरण का कार्य अनिवार्य रूप से पूर्ण करने को कहा। उन्होंने बताया कि जिले की 114 सहकारी समितियों के माध्यम से सामान्य सुविधा केंद्र (CSC) संचालित किए जा रहे हैं, जिन्हें ग्रामीणों और किसानों के लिए अधिक उपयोगी बनाने की आवश्यकता है। इसके अलावा, विकासखंड दुगड्डा की सिद्धबाबा कृषक उत्पादन संगठन (FPO) की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए इसके विस्तार और लाभ बढ़ाने के निर्देश दिए गए। बैठक में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र, पशु केंद्रों के संचालन और अन्न भंडारण योजना की प्रगति पर भी चर्चा हुई।
कृषि और किसानों की आय से जुड़े मुद्दों पर जिलाधिकारी ने ‘कोऑपरेशन अमंग कोऑपरेटिव्स’ (सहकारिता के बीच सहयोग) की भावना के अनुरूप काम करने पर बल दिया। माधो सिंह भंडारी सहकारी खेती योजना के तहत कन्वर्जेंस (अभिसरण) के माध्यम से क्लस्टर मॉडल विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने एकेश्वर के बनेखखाल, पाबौ के ढिक्वाली और थलीसैंण के हस्यूड़ी में फूलों के उत्पादन वाले क्लस्टर्स की समीक्षा की। अधिकारियों से शुद्ध लाभ की स्थिति जानते हुए उन्होंने उत्पादों में विविधता और मूल्य संवर्द्धन (Value Addition) पर ध्यान देने को कहा, ताकि किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके। साथ ही, बेमौसमी सब्जियों, मशरूम उत्पादन और कुक्कुट वैली परियोजना के लिए एक सप्ताह के भीतर पात्र लाभार्थियों का चिन्हीकरण पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार को लेकर जिलाधिकारी ने दूरस्थ क्षेत्रों में सहकारी बैंक के एटीएम स्थापित करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने माइक्रो बैंक की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए उन क्षेत्रों को चिन्हित करने को कहा जहां वर्तमान में एटीएम की सुविधा उपलब्ध नहीं है, ताकि सहकारी बैंक की जिम्मेदारी तय कर ग्रामीणों को सुविधा दी जा सके।
मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने कहा कि सहकारी समितियों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका के मजबूत केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने विभिन्न विभागों की योजनाओं को सहकारिता से जोड़कर क्लस्टर आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया, जिससे किसानों को उत्पादन से बाजार तक बेहतर लाभ मिल सके। इस अवसर पर सहायक जिला निबंधक सहकारिता सुमन कुमार, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विशाल शर्मा, जिला पूर्ति अधिकारी अरुण कुमार वर्मा, जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन सिंह भंडारी, नाबार्ड प्रबंधक हिमांक शर्मा सहित संबंधित अधिकारी एवं सहकारी समितियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
