देहरादून।
उत्तराखंड में हुए 800 करोड़ रुपये के LUCC घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पहली बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने पांच महीने की जांच के बाद 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि इस पूरे घोटाले का मुख्य मास्टरमाइंड समीर अग्रवाल अभी भी फरार है और उसकी पत्नी सानिया अग्रवाल के साथ विदेश भागने की जानकारी मिली है।CBI के अनुसार, इस घोटाले में करीब 1.5 लाख निवेशकों को फंसाया गया था। फर्जी जमा योजनाओं के जरिए लोगों से 800 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई गई, जिसमें 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी हुई।

CBI ने सुशील गोखरू, राजेंद्र सिंह बिष्ट, तरुण कुमार मौर्य, गौरव रोहिल्ला और ममता भंडारी को गिरफ्तार किया है। इन सभी पर IPC, BNS, उत्तराखंड निवेशकों के हित संरक्षण कानून और BUDS Act के तहत मामला दर्ज किया गया है।
LUCC (Loni Urban Multi-State Credit and Thrift Cooperative Society) का मुख्यालय गाजियाबाद में था, लेकिन इसने उत्तराखंड में बिना अनुमति के 35 शाखाएं खोल ली थीं। देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी और कोटद्वार सहित 6 जिलों में इन शाखाओं के जरिए लोगों को आकर्षक ब्याज दर का लालच देकर FD और RD योजनाओं में निवेश करने के लिए प्रलोभन दिया गया। कंपनी ने स्थानीय लोगों को एजेंट बनाकर भारी कमीशन का लालच दिया। पड़ोसी और रिश्तेदारों के भरोसे पर हजारों लोग अपनी गाढ़ी कमाई लगाते रहे। विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए बॉलीवुड अभिनेताओं आलोक नाथ और श्रेयस तलपड़े जैसे चेहरों को ब्रांड एंबेसडर बनाया गया।

जून 2024 में अचानक पूरे उत्तराखंड में LUCC की सभी शाखाएं बंद हो गईं। इसके बाद कोटद्वार में पहली FIR दर्ज हुई और बाद में 18 FIR दर्ज की गईं। हाईकोर्ट के आदेश पर सितंबर 2025 में जांच CBI को सौंपी गई। नवंबर 2025 में CBI ने सभी मामलों को मिलाकर एक बड़ी FIR दर्ज की थी।
CBI ने ठगी की रकम से खरीदी गई अचल संपत्तियों की सूची तैयार कर ली है। इन संपत्तियों को फ्रीज करने और BUDS Act, 2019 के तहत पीड़ित निवेशकों को राहत देने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए उत्तराखंड सरकार को पत्र लिखा गया है। एजेंसी समीर अग्रवाल और उसकी पत्नी की तलाश में विशेष टीम बना चुकी है।यह घोटाला उत्तराखंड में हुए सबसे बड़े सहकारी ठगी मामलों में से एक है, जिसने हजारों परिवारों की जीवन भर की कमाई को चपत कर दिया। CBI की इस कार्रवाई से पीड़ितों में कुछ उम्मीद जगी है, हालांकि मास्टरमाइंड के फरार होने से जांच अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
