श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में शनिवार को समसामयिक और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर एक गंभीर अकादमिक चर्चा का आयोजन किया गया। डॉ. अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र (DACE) तथा निःशुल्क कोचिंग योजना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी में ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ (FCRA) और ‘खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 2026’ (MMDR Act) पर विस्तृत मंथन किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने विदेशी फंडिंग, राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के रणनीतिक महत्व पर अपने सुविचारित विचार साझा किए।

कार्यक्रम की शुरुआत केंद्र की छात्रा सेजल द्वारा विषय के सटीक परिचय के साथ हुई। एफसीआरए संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा के दौरान विद्यार्थियों ने विदेशी योगदान के सामाजिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं मानवीय कार्यों में सकारात्मक उपयोग पर प्रकाश डाला। साथ ही, इस प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी नियमन की अनिवार्यता पर भी जोर दिया गया। चर्चा को आगे बढ़ाते हुए डॉ. आशीष बहुगुणा ने स्पष्ट किया कि विदेशी फंडिंग निश्चित रूप से विकास कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, लेकिन इसके दुरुपयोग से राष्ट्रीय सुरक्षा एवं संप्रभुता के समक्ष गंभीर चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने वैध सामाजिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और राष्ट्रहितों की सुरक्षा के बीच एक सूक्ष्म संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता बताई।
वहीं, एमएमडीआर (MMDR) विधेयक पर केंद्रित चर्चा में विद्यार्थियों ने क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) के वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में बढ़ते रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा क्षेत्र, दूरसंचार और उन्नत प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए इन खनिजों की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में घरेलू स्तर पर इनके अन्वेषण, उत्पादन, प्रसंस्करण और एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) का निर्माण भारत की आर्थिक एवं रणनीतिक आत्मनिर्भरता के लिए अनिवार्य है।
इस अकादमिक सत्र के दौरान फैकल्टी सदस्यों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। डॉ. मुकेश सहाय ने विद्यार्थियों को दोनों विधेयकों का निष्पक्ष, वस्तुनिष्ठ और संतुलित दृष्टिकोण से गहन अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। डॉ. शैलेंद्र चमोला एवं डॉ. अरविंद सिंह रावत ने भी विद्यार्थियों को तुलनात्मक चिंतन, संवैधानिक जागरूकता और तथ्याधारित विश्लेषण करने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि वे किसी भी नीतिगत निर्णय की सही परख कर सकें।
चर्चा सत्र में साक्षी वर्मा, अंकुल, अभिषेक, अश्विन, रघुवीर, आकाश धीमान, विपिन एवं सुमित सहित कई विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और दोनों विधेयकों के सामाजिक, आर्थिक, संवैधानिक एवं रणनीतिक पहलुओं पर अपने तर्क प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का समापन दोनों विधेयकों के संभावित लाभों और चुनौतियों के संतुलित मूल्यांकन तथा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप भविष्य की राह तय करने के सामूहिक विचार के साथ हुआ।
