देहरादून:
राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और स्थानीय काश्तकारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने की दिशा में प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में बुधवार को शासकीय आवास पर ‘वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम’ के अंतर्गत भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (ITBP) और उत्तराखंड औद्यानिक परिषद के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस नई व्यवस्था के तहत अब प्रदेश में तैनात आईटीबीपी की बटालियनों को स्थानीय स्तर पर उत्पादित ताजे फल और सब्जियों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पहल को राज्य के किसानों और सीमांत क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि इस समझौते से न केवल आईटीबीपी के वीर जवानों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध होगी, बल्कि दुर्गम क्षेत्रों में मेहनत कर रहे किसानों को भी उनकी उपज का उचित मूल्य घर के पास ही मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कदम स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने और किसानों के लिए एक स्थायी विपणन मंच तैयार करने की सरकार की प्रतिबद्धता का हिस्सा है।
इस योजना का सीधा लाभ चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और चंपावत जैसे सुदूरवर्ती सीमांत जिलों के साथ-साथ देहरादून के स्थानीय उत्पादकों को भी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने पूर्व के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत पहले भी आईटीबीपी और राज्य सरकार के बीच हुए समझौतों के उत्साहजनक परिणाम रहे हैं। अब तक आईटीबीपी द्वारा राज्य से लगभग 14 करोड़ 77 लाख रुपये के स्थानीय उत्पाद खरीदे जा चुके हैं, जिसे भविष्य में और विस्तार देने की योजना है।
आंकड़ों के अनुसार, आईटीबीपी अपनी कुल वार्षिक मांग का 25 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय किसानों से ही खरीदेगी। इस व्यवस्था से प्रदेश के किसानों को सालाना लगभग 6 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी होने का अनुमान है। यह समझौता सीमांत क्षेत्रों में बाजार की अनुपलब्धता के कारण होने वाली कठिनाइयों को दूर करने में सहायक सिद्ध होगा। इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी, सचिव कृषि एस.एन. पाण्डेय, आईजी आईटीबीपी मनु महाराज और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
