श्रीनगर गढ़वाल। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र में निर्दलीय प्रत्याशियों की सक्रियता भी तेज हो गई है। इसी कड़ी में चौथान पट्टी के लिंगुड़िया गांव निवासी एवं मेडिकल प्रोफेशनल विजय रावत ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपनी दावेदारी पेश की है। ‘लेट राधा देवी वेलफेयर ट्रस्ट’ के अध्यक्ष रावत ने स्पष्ट किया कि वे किसी राजनीतिक दल के ‘बी-टीम’ नहीं हैं, बल्कि अपने पिछले सामाजिक कार्यों और यथार्थवादी घोषणापत्र के दम पर जनता के बीच आये हैं। उन्होंने एक सनसनीखेज ऐलान किया है कि चुनाव जीतने के बाद यदि उन्होंने छह महीने के भीतर अपने घोषणापत्र के वादे पूरे नहीं किए, तो वे न केवल अपने पद से इस्तीफा देंगे, बल्कि अपनी सारी विधायक निधि और वेतन सरकार को लौटाकर राजनीति से हमेशा के लिए सन्यास ले लेंगे।

सामाजिक कार्यों के दम पर पेश की दावेदारी
विजय रावत ने बताया कि राजनीति में आना कभी उनका लक्ष्य नहीं था, लेकिन सामाजिक कार्य करते समय ‘सिस्टम’ की अड़चनों ने उन्हें इस मैदान में आने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने बताया कि उनके ट्रस्ट द्वारा पिछले दो वर्षों में 14 बड़े स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं और गैरसैण में एक निजी अस्पताल भी स्थापित किया गया है। अब तक 245 गंभीर मरीजों को दिल्ली में निःशुल्क इलाज दिलाया जा चुका है। उन्होंने 2013 की केदारनाथ आपदा से लेकर कोविड काल तक किए गए राहत कार्यों का जिक्र करते हुए खुद को ‘पैराशूट कैंडिडेट’ बताने वालों को करारा जवाब दिया। उनका दीर्घकालिक विजन 2028 तक प्रदेश को एक मेडिकल कॉलेज की सौगात देने का है।
स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार पर विशेष फोकस
रावत ने पहाड़ों में डॉक्टरों की कमी को एक गंभीर समस्या मानते हुए एक व्यावहारिक रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि विशेषज्ञ डॉक्टरों को अस्थायी (अड-हॉक) आधार पर रखा जाए, जहां 15 दिन उनकी ड्यूटी पहाड़ी क्षेत्रों में और 15 दिन बाहर हो, ताकि उनकी व्यक्तिगत सुविधाओं और पहाड़ की जरूरतों में संतुलन बन सके। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने बेहतरीन शिक्षकों की नियुक्ति और ग्रामीण बच्चों को नीट (NEET), यूपीएससी (UPSC) व आईआईटी (IIT) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी एवं मार्गदर्शन देने का संकल्प लिया।
रोजगार सृजन के लिए उन्होंने एक नए ‘पार्टनरशिप मॉडल’ की बात कही। इसके तहत प्राइवेट कंपनियों को पहाड़ों में जमीन और इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराया जाएगा, लेकिन मालिकाना हक या बड़ी हिस्सेदारी स्थानीय युवाओं और निवासियों की होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे हर घर को सरकारी नौकरी देने जैसे अव्यावहारिक जुमले नहीं बांटेंगे, बल्कि जमीनी स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करेंगे।
यूकेडी छोड़ने का कारण और युवाओं से अपील
उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के पूर्व केंद्रीय महासचिव रह चुके विजय रावत ने पार्टी छोड़ने का कारण स्पष्ट करते हुए कहा कि जब वे सामाजिक कार्य कर रहे थे, तो लोगों को लगता था कि वे किसी पार्टी के इशारे पर काम कर रहे हैं, जिससे उनके ट्रस्ट के कामों में अड़चनें आ रही थीं। उन्होंने आज की राजनीति में लगने वाले ‘अंधभक्त’, ‘चमचा’ या ‘अलगाववादी’ जैसे लेबल्स से दूर रहने का फैसला किया है।
साथ ही, उन्होंने प्रदेश के युवाओं से अपील की कि वे केवल सोशल मीडिया पर विरोध प्रदर्शन करने तक सीमित न रहें, बल्कि चुनाव लड़कर सीधे तौर पर सिस्टम का हिस्सा बनें और बदलाव लाएं। रावत ने कहा कि बिना शराब और भारी पैसे की राजनीति के भी कम खर्चे में चुनाव लड़ा जा सकता है। चुनाव का रिजल्ट चाहे जो हो, उनका सामाजिक कार्य और अस्पताल की सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगी।
