Ganga Vatika me vriksharopan ke sath plastic mukti ka sankalp

न्यायिक पहल से हरेला को मिला नया आयाम: गंगा वाटिका में वृक्षारोपण के साथ प्लास्टिक मुक्ति का संकल्प, विधिक समिति ने दिखाई राह।

श्रीनगर गढ़वाल। पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी अब केवल वन या प्रदूषण नियंत्रण संस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि न्यायिक तंत्र भी पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने की मुहिम में अग्रिम पंक्ति में खड़ा हो गया है। हरेला महापर्व के पावन अवसर पर उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (नैनीताल) और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (पौड़ी गढ़वाल) के संयुक्त दिशा-निर्देशों के तहत गुरुवार को अलकनंदा के तट पर स्थित श्रीयंत्र टापू की गंगा वाटिका में एक वृहद और सार्थक वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। यह आयोजन केवल एक पारंपरिक रस्म अदायगी नहीं थी, बल्कि इसके माध्यम से विधिक समिति ने आमजन को प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई और प्रकृति के संरक्षण का एक ठोस और गंभीर संदेश दिया।

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सुबह नौ बजे आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता तहसील विधिक सेवा समिति की अध्यक्ष एवं सिविल जज (जूनियर डिवीजन) कुमारी अलका ने की। उनके नेतृत्व में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे गए। इस दौरान उन्होंने हरेला पर्व के मूल स्वरूप को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि यह पर्व महज एक परंपरा या उत्सव नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति मानव जाति की नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। कुमारी अलका ने उपस्थित जनसमुदाय से केवल पौधे लगाने तक ही सीमित न रहने, बल्कि उनके दीर्घकालिक संरक्षण और नियमित देखभाल का भी कठोर संकल्प लेने का आह्वान किया। साथ ही, नदी तटीय क्षेत्रों में बढ़ते प्लास्टिक कचरे के खतरे को देखते हुए सभी नागरिकों से प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह से त्यागने और पर्यावरण को विषाक्त होने से बचाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई।

कचहरी के वकीलों और विधिक विशेषज्ञों ने इस सामाजिक दायित्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे स्पष्ट हुआ कि न्याय का दायरा अब अदालत की चारदीवारी से निकलकर समाज के व्यापक हितों तक फैल चुका है। बार एसोसिएशन के संरक्षक अनूप श्री पांथरी, अध्यक्ष प्रमेश चंद्र जोशी और स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर डॉ. बी.पी. नैथानी ने पर्यावरण संरक्षण को मौलिक अधिकारों से जोड़ते हुए अपने विचार रखे। इसके अलावा विकास पंत (पूर्व महासचिव), ब्रह्मानंद भट्ट (महासचिव), प्रदीप मैठाणी (पूर्व सह-सचिव), सुबोध भट्ट (कोषाध्यक्ष) और देवी प्रसाद खरे (सह-सचिव) सहित आर.पी. थपलियाल, बलवीर सिंह रौतेला, नितेश भारती, कुलदीप दानू, प्रेरणा काला, लक्ष्मीकांत, रतन सिंह बिष्ट और गौरव उपाध्याय जैसे वरिष्ठ अधिवक्ताओं एवं गणमान्य नागरिकों ने हाथों में पौधे थामे इस मुहिम को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान की।

न्यायिक प्रणाली को जमीन से जोड़ने में पैरा लीगल वालंटियर्स (PLVs) की भूमिका हमेशा अहम रही है। इस अवसर पर पीएलवी सदस्य मानव बिष्ट, प्रकाश नेगी, प्रीति बिष्ट, रोशनी देवी, पूनम हटवाल और प्रियंका रॉय ने न केवल वृक्षारोपण में सक्रिय सहयोग दिया, बल्कि आसपास के ग्रामीणों को हरेला के पारिस्थितिक महत्व और प्लास्टिक मुक्ति के बारे में जागरूक भी किया। न्यायालय के कर्मचारियों ने भी प्रशासनिक कार्यों से हटकर प्रकृति की इस सेवा में अपना योगदान दिया, जिनमें निर्मल सिंह, रीडर शिवानी बिष्ट, आनंद प्रसाद, भारती, अंशुल तथा देवी रौथान प्रमुख रूप से शामिल रहे। वृक्षारोपण को केवल एक औपचारिकता न बनने देने के लिए वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने पूरे अभियान में तकनीकी सहयोग प्रदान किया और पौधों के सही रोपण व उनकी प्रारंभिक देखभाल के वैज्ञानिक तरीकों से लोगों को अवगत कराया।

गंगा वाटिका का यह शांत वातावरण इस बात का प्रमाण था कि जब न्यायपालिका, विधिक समुदाय, प्रशासन और आमजन एक मंच पर आते हैं, तो ‘हरित उत्तराखंड’ और ‘स्वच्छ पर्यावरण’ का लक्ष्य केवल एक नारा नहीं रह जाता, बल्कि वह एक ठोस वास्तविकता में बदल जाता है। इस आयोजन के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का जो संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया, वह श्रीनगर ही नहीं, बल्कि पूरे जनपद के लिए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नई और सकारात्मक मिसाल स्थापित करने वाला साबित होगा।

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