श्रीनगर।
राजकीय मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कोर्स पूरा करने के बाद बेस अस्पताल में एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप करने वाले प्रशिक्षुओं के लिए एक दिवसीय इंटर्नशिप ओरिएंटेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवप्रशिक्षु चिकित्सकों को व्यावहारिक चिकित्सा सेवा के लिए तैयार करना और मरीजों के प्रति उनकी जिम्मेदारियों से अवगत कराना था।कार्यक्रम में एमबीबीएस की पढ़ाई पूर्ण करने के बाद मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवा देने से संबंधित विभिन्न टिप्स और दिशा-निर्देश साझा किए गए।

विशेषज्ञों ने बताया कि इंटर्नशिप केवल प्रशिक्षण का चरण नहीं है, बल्कि एक चिकित्सक के वास्तविक करियर की मजबूत नींव होती है।इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि इंटर्नशिप उनके भविष्य और करियर को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह सीखने, समझने और अपने कौशल को निखारने का सबसे उपयुक्त समय होता है।
उन्होंने इंटर्नशिप के दौरान मरीजों की सहायता करने के तरीके पर विस्तार से जानकारी दी और कहा कि एक डॉक्टर में संवेदनशीलता, धैर्य और जिम्मेदारी जैसे गुण अत्यंत आवश्यक हैं।प्राचार्य ने बताया कि अनिवार्य रोटेशन आधारित मेडिकल इंटर्नशिप के माध्यम से प्रशिक्षु विभिन्न विभागों में बारी-बारी से काम करेंगे, जिससे वे हर क्षेत्र में दक्षता हासिल कर सकेंगे। यह वह अवसर है जहां छात्र अपने ज्ञान को व्यवहार में उतारना सीखते हैं और चिकित्सा क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों को समझते हैं।

डॉ. सयाना ने कहा कि जब श्रीनगर मेडिकल कॉलेज का नाम अच्छे कार्यों के लिए सामने आता है तो संस्थान के लिए यह गर्व की बात होती है। छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन और मरीजों को दी जाने वाली सेवाएं ही संस्थान की पहचान बनाते हैं।प्राचार्य ने सभी इंटर्नों को इंटर्नशिप की बधाई देते हुए कहा कि उन्हें मरीजों के हित में बेहतर कार्य करना चाहिए और खुद को एक कुशल चिकित्सक के रूप में विकसित करना चाहिए। सेवा भावना के साथ किया गया कार्य ही एक डॉक्टर की असली पहचान होता है।कार्यक्रम में कार्यशाला संयोजक डॉ. सुरेंद्र सिंह नेगी सहित अन्य फैकल्टी सदस्यों ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने इंटर्नशिप के दौरान आने वाली चुनौतियों, जिम्मेदारियों और उनसे निपटने के प्रभावी तरीकों पर प्रकाश डाला।
