चमोली।
चमोली जिले के थराली क्षेत्र में आपदा से प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के लिए शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री Harish Rawat पहुंचे। उन्होंने थराली मुख्य बाजार से जनसंपर्क करते हुए चेपड़ो गांव का दौरा किया और वहां आपदा पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने राहत कार्यों, मुआवजे और सुरक्षा उपायों को लेकर सरकार की आपदा प्रबंधन नीति पर सवाल उठाए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रभावितों को पर्याप्त सहायता नहीं मिल रही है और मुआवजे के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी समाधान की दिशा में ठोस प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि थराली बाजार आपदा की चपेट में आ चुका है, जबकि पिंडर नदी के किनारे हो रहा लगातार कटाव भविष्य में बड़े खतरे की आशंका पैदा कर रहा है। साथ ही क्षेत्र में बढ़ते भू-धंसाव को भी उन्होंने गंभीर चिंता का विषय बताया।

Harish Rawat ने अपनी सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 की आपदा के दौरान प्रभावितों को 5 लाख रुपये की सहायता के साथ मुख्यमंत्री राहत कोष से अतिरिक्त 2 लाख रुपये और केंद्र सरकार से भी सहयोग उपलब्ध कराया गया था। उन्होंने वर्तमान व्यवस्था की तुलना करते हुए कहा कि अब सीमित मुआवजा देकर प्रभावितों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा के बजट सत्र से पहले उन्होंने सरकार को राहत कार्यों के लिए समय दिया था और सत्र के बाद स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने की घोषणा की थी। इसी क्रम में वह थराली पहुंचे हैं। इससे पहले 16 अप्रैल को वह उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र का भी दौरा कर चुके हैं।
इस दौरे के दौरान स्थानीय लोगों ने भी अपनी समस्याएं और चिंताएं उनके सामने रखीं, जिनमें सुरक्षा कार्यों की कमी, नदी कटाव और पुनर्वास से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। दौरे के माध्यम से आपदा प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति और राहत कार्यों की प्रगति एक बार फिर चर्चा में आई है।
