श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में छात्र सलाहकार समिति और नवनिर्वाचित छात्रसंघ पदाधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण संवादात्मक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मूल उद्देश्य नवनिर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों का स्वागत करना, उनकी प्राथमिकताओं को समझना और विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण, छात्र कल्याण, आधारभूत सुविधाओं एवं विद्यार्थियों से जुड़ी समस्याओं पर खुले मंच पर विचार-विमर्श करना था। प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच हुए इस सार्थक संवाद ने विश्वविद्यालय में एक सकारात्मक और सहयोगात्मक शैक्षणिक संस्कृति की नींव को और मजबूत किया है।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए चीफ स्टूडेंट्स एडवाइजर प्रो. एम.एम. सेमवाल ने नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों को बधाई दी और छात्र राजनीति में लोकतांत्रिक मूल्यों, संवाद, धैर्य एवं जिम्मेदार प्रतिनिधित्व के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रसंघ से अपील की कि वे विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक परंपराओं और सकारात्मक शैक्षणिक संस्कृति को सुदृढ़ करने में प्रशासन का सहयोग करें। वहीं, ज्वाइंट स्टूडेंट्स एडवाइजर प्रो. सीमा धवन ने विद्यार्थियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने और उनके समाधान के लिए प्रभावी संवाद एवं संस्थागत सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल समस्याओं की पहचान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके समाधान हेतु रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत करना भी अत्यंत आवश्यक है। प्रो. धवन ने यह भी जानकारी दी कि छात्र सलाहकार समिति अपनी भूमिका का विस्तार करते हुए टिहरी एवं पौड़ी परिसरों के विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान की दिशा में भी सक्रिय रूप से कार्य करेगी।
टिहरी परिसर की ज्वाइंट स्टूडेंट्स एडवाइजर प्रो. ममता राणा ने छात्र प्रतिनिधियों का आह्वान किया कि वे विश्वविद्यालय की चुनौतियों की पहचान करें और उनके समाधान के लिए सामूहिक एवं रचनात्मक प्रयास करें। उन्होंने विद्यार्थियों की नियमित कक्षा उपस्थिति, सकारात्मक शैक्षणिक माहौल और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक पहचान को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। बैठक का संचालन कर रहीं डिप्टी स्टूडेंट्स एडवाइजर डॉ. कविता भट्ट ने सभी नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने छात्रसंघ की सक्रिय और रचनात्मक भूमिका को विश्वविद्यालय के समग्र विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। डॉ. भट्ट ने छात्र सलाहकार समिति को विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच एक मजबूत ‘संवाद-सेतु’ करार देते हुए आश्वस्त किया कि विद्यार्थियों के हर जायज मुद्दे और सुझाव को उचित मंच तक पहुंचाया जाएगा।
इस खुले और पारदर्शी संवाद सत्र के दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष हिमांशु भंडारी, सचिव मयंक बहुगुणा, उपाध्यक्ष पुलकित अग्रवाल सहित अन्य छात्र प्रतिनिधियों ने विद्यार्थियों से जुड़े अनेक अहम मुद्दे और व्यावहारिक सुझाव प्रशासन के समक्ष रखे। प्रतिनिधियों ने बेहतर प्लेसमेंट, रोजगारोन्मुखी सुविधाओं, विद्यार्थियों के लिए स्वास्थ्य बीमा, शोधार्थियों हेतु परिवहन सुविधा, स्मार्ट क्लासरूम और प्रयोगशालाओं में आवश्यक उपकरणों एवं रसायनों की निरंतर उपलब्धता की मांग की।
इसके अलावा, विश्वविद्यालय स्वास्थ्य केंद्र में नियमित चिकित्सक की तैनाती, पुस्तकालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप नवीन एवं प्रासंगिक पुस्तकों की व्यवस्था, छात्रावासों में स्वच्छता, पेयजल एवं आधारभूत सुविधाओं में सुधार जैसे जमीनी मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। आईटैप (i-TAP) विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त कक्षाओं एवं नियमित शिक्षकों की उपलब्धता, लैंगिक समानता, समान अवसर, अकादमिक एवं सांस्कृतिक क्लबों के सुचारू संचालन, कौशल विकास कार्यशालाओं और यूपीएससी (UPSC) मार्गदर्शन की सुविधा विकसित करने जैसे दूरदर्शी विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक के समापन पर डॉ. अमरजीत सिंह परिहार ने सभी छात्र प्रतिनिधियों एवं उपस्थित सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने प्रशासन की ओर से स्पष्ट आश्वासन दिया कि विद्यार्थियों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को उचित संस्थागत प्रक्रिया के माध्यम से संबंधित स्तर पर पहुंचाया जाएगा और उनके समयबद्ध समाधान की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएंगे। यह बैठक सकारात्मक संवाद, आपसी सहयोग और विद्यार्थियों के सर्वोच्च हित में सामूहिक रूप से कार्य करने के दृढ़ संकल्प के साथ संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में अमन कुनियाल, सुनिधि सिंह, युवराज सिंह, अभिराज सिंह नेगी, नवनीत गुप्ता और रामस्वरूप गुर्जर सहित अन्य छात्र प्रतिनिधि एवं समिति के सदस्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय प्रशासन की यह पहल छात्रों और प्रशासन के बीच विश्वास का एक नया अध्याय लिखने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।
