श्रीनगर गढ़वाल। न्यायिक प्रणाली में लंबित मामलों के बोझ को कम करने और वादकारियों को त्वरित, सुलभ एवं आपसी सहमति आधारित न्याय दिलाने की दिशा में आज शनिवार को बाह्य न्यायालय श्रीनगर में राष्ट्रीय लोक अदालत का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UKSLSA) नैनीताल के निर्देश एवं जिला जज सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पौड़ी गढ़वाल के आदेशानुसार आयोजित इस विशेष अदालत की अध्यक्षता सिविल जज एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) कुमारी अलका ने की। इस दौरान पीठ के सदस्य के रूप में विद्वान अधिवक्ता नितेश भारती ने अहम भूमिका निभाई।

बाह्य न्यायालय श्रीनगर द्वारा इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 317 मामलों का सफल निस्तारण किया गया, जो न्यायिक सुधारों की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि रही। निस्तारित मामलों में सर्वाधिक 301 फौजदारी वाद शामिल रहे। इसके अलावा, परक्राम्य लिखत अधिनियम (एन.आई. एक्ट) यानी चेक बाउंस के 3 मामले, अंतिम रिपोर्ट के 9 मामले, घरेलू हिंसा (डीवी) एक्ट का 1 मामला, बैंक रिकवरी के 2 मामले तथा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) का 1 मामला शामिल था। लोक अदालत के माध्यम से इन मामलों का निपटारा आपसी समझौते और सुलह के आधार पर किया गया, जिससे वादकारियों को लंबी और खर्चीली कानूनी प्रक्रिया से स्थायी राहत मिली।
लोक अदालत के सफल संचालन में श्रीनगर बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं का पूर्ण सहयोग रहा। इस अवसर पर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमेश चन्द्र जोशी, संरक्षक अनूप श्री पांथरी एवं बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन सिंह भंडारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। अधिवक्ताओं ने वादकारियों को लोक अदालत के लाभों से अवगत कराते हुए आपसी सुलह के लिए प्रेरित किया। महासचिव ब्रह्मानंद भट्ट, विकास पंत, देवी प्रसाद खरे, प्रदीप मैठाणी, सुबोध भट्ट, विकास कैठेत, राखी राय, महेंद्र पाल सिंह रावत, भूपेंद्र पुंडीर, कविता मेवाड़, सुरेंद्र सिंह रौथान, सुनीता भंडारी, गौरव उपाध्याय, आनंद सिंह बुटोला, कुलदीप दानू, रतन सिंह बिष्ट, लक्ष्मीकांत और प्रेरणा काला सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई।
न्याय को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में पैरा लीगल वालंटियर्स (पीएलवी) और न्यायालय कर्मचारियों का योगदान भी सराहनीय रहा। पीएलवी सदस्य प्रीति बिष्ट, पूनम हटवाल, प्रियंका रॉय, प्रकाश नेगी, मानव बिष्ट और रोशनी देवी ने वादकारियों के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। वहीं, न्यायालयीन कार्यों को सुचारू रूप से संपन्न कराने में रीडर ज्योतिष धिल्डियाल, स्टेनो हिरदेश कुमारी, निर्मल सिंह, सोहन सिंह एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी आनन्द प्रसाद भारती सहित अन्य स्टाफ सदस्यों ने पूरी निष्ठा से कार्य किया। राष्ट्रीय लोक अदालत के इस सफल आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि न्यायपालिका, विधिक समुदाय और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से आमजन को सुलभ और त्वरित न्याय दिलाया जा सकता है।
