देहरादून। प्रदेश में डिजिटल मीडिया के लिए पारदर्शी विज्ञापन नीति और पत्रकारों के विभिन्न हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर ‘वॉयस ऑफ मीडिया, नॉर्थ जोन, उत्तराखंड’ ने राज्य सरकार के साथ व्यापक स्तर पर बैठक आयोजित करने की मांग की है। इसी क्रम में संगठन की ओर से मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार एवं राज्य मंत्री धीरेंद्र पंवार को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें मीडिया जगत से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा का अनुरोध किया गया है।

वॉयस ऑफ मीडिया ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि वर्तमान समय में डिजिटल मीडिया पत्रकारिता का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी माध्यम बन चुका है। आज बड़ी संख्या में पत्रकार एवं मीडिया संस्थान वेब पोर्टल, डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के माध्यम से जनता तक समाचार एवं सूचनाएं पहुंचा रहे हैं। ऐसे में सरकारी विज्ञापन नीति में डिजिटल मीडिया के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और समान अवसर वाली व्यवस्था का होना समय की अनिवार्य मांग है। संगठन का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में कई विसंगतियां हैं, जिन पर सरकार के साथ खुले मंच पर चर्चा होनी चाहिए।
ज्ञापन में छोटे एवं क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों की व्यावहारिक समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया है। संगठन ने मांग की है कि प्रस्तावित बैठक के एजेंडे में पत्रकारों की मान्यता, उनकी सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तथा विज्ञापन व्यवस्था से जुड़े सभी विषयों को शामिल किया जाए। वॉयस ऑफ मीडिया ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकार के साथ होने वाली इस बैठक में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल मीडिया, वेब पोर्टल तथा क्षेत्रीय मीडिया से जुड़े विभिन्न वर्गों के पत्रकारों और प्रतिनिधियों को समान रूप से शामिल किया जाए, ताकि नीति निर्माण एवं समाधान की प्रक्रिया अधिक व्यापक, प्रभावी और समावेशी हो सके।
संगठन के नॉर्थ जोन अध्यक्ष दिनेश पाल सिंह गुसाईं ने बताया कि वॉयस ऑफ मीडिया का मूल उद्देश्य सरकार और पत्रकारिता जगत के बीच संवाद को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों एवं मीडिया संस्थानों की वास्तविक और जमीनी समस्याओं पर सकारात्मक संवाद के माध्यम से ही व्यावहारिक समाधान तलाशे जा सकते हैं। संगठन को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार धीरेंद्र पंवार इस ज्ञापन पर संज्ञान लेते हुए जल्द ही सरकार और मीडिया जगत के प्रतिनिधियों के बीच एक सार्थक बैठक का आयोजन करवाएंगे, जिससे प्रदेश की मीडिया नीतियों में आवश्यक सुधार हो सके।
