श्रीनगर गढ़वाल। शहर की पेयजल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बरसों से लंबित शिकायतों और बदहाल जलापूर्ति से तंग आकर सोमवार को भाजपा पार्षद और स्थानीय नागरिक जीआईसी मार्ग स्थित जल संस्थान के विरुद्ध सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों का दो-टूक आरोप था कि नालियों के बीचों-बीच और उनके ऊपर से गुजरती पेयजल पाइपलाइनें, जर्जर हो चुकी जल संरचनाएं और जरूरत से कम जलापूर्ति के बावजूद जल संस्थान विभाग ने गंभीर पेयजल समस्याओं की ओर आंख मूंद रखी है।

धरने की सूचना मिलते ही नगर निगम मेयर आरती भंडारी प्रदर्शनस्थल पहुंचीं। उन्होंने धरने पर बैठे भाजपा पार्षद और स्थानीय लोगों से विस्तार से बातचीत की और एक-एक शिकायत को गंभीरता के साथ सुना। मेयर ने आंदोलनकारियों को भरोसा दिलाया कि उनकी आवाज को किसी सूरत में अनसुना नहीं किया जाएगा और जनता की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े किसी भी मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
मौके पर ही मेयर ने जल संस्थान के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट निर्देश दिए कि श्रीनगर क्षेत्र की सभी नालियों से होकर गुजर रही पेयजल पाइपलाइनों को तत्काल हटाकर भूमिगत किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को आगाह करते हुए कहा कि –
“जर्जर हो चुकी ये संरचनाएं न केवल नालियों को चोक कर रही हैं, बल्कि लीकेज के कारण पीने के पानी में सीवर और गंदा पानी मिलने का खतरा हर वक्त मंडरा रहा है। यह सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ है और हैजा, पीलिया जैसी जलजनित बीमारियों को दावत दे रहा है। यही स्थिति आगे चलकर संक्रमण और जनस्वास्थ्य पर बड़ा खतरा बन सकती है।”
मेयर की इस कार्यवाही से ये साफ़ प्रतीत होता है की वो अब केवल निगम के दायरे तक खुद को सीमित रखने के मूड में नहीं हैं।
प्रदर्शनकारियों ने जल संस्थान के अफसरों की उस मानसिकता पर सवाल उठाए, जो महीनों से की जा रही शिकायतों के बावजूद फाइलों पर धूल जमाए बैठी है। रामलीला मैदान चौराहे से पाण्डेय गली तक के दक्षिणी हिस्से में एक अलग और सक्षम पेयजल लाइन बिछाने की मांग सालों से लंबित है। इसके अलावा, रामलीला मैदान क्षेत्र में बनी पुरानी और जर्जर पानी की टंकी को हटाकर नई टंकी बनाने की फाइल भी विभाग की टेबल पर अटकी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन बुनियादी समस्याओं के कारण उनकी रोजमर्रा की जिंदगी नर्क बन चुकी है।
रामलीला मैदान क्षेत्र की समस्या को मेयर आरती भंडारी ने विशेष गंभीरता से लिया। उन्होंने साफ कर दिया कि यदि जल संस्थान ने समय रहते इसका समाधान नहीं किया, तो वह स्वयं इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर करवाने के लिए आगे आएंगी। निगम के संसाधनों या अन्य माध्यमों से यह काम कराया जाएगा, लेकिन जनता को प्यासा नहीं रखा जाएगा। उनकी इस घोषणा से धरने पर बैठे लोगों में एक नया भरोसा पैदा हुआ।
अपने रुख को स्पष्ट करते हुए मेयर आरती भंडारी ने कहा,
“मैं सिर्फ नगर निगम के कार्यों तक सीमित नहीं हूं। श्रीनगर की जनता की हर समस्या मेरी अपनी समस्या है। चाहे मामला किसी भी विभाग से जुड़ा हो, अगर जनता परेशान है तो मैं उनके साथ खड़ी हूं। जल संस्थान को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी नालियों से पाइपलाइन हटाकर भूमिगत की जाए। यदि रामलीला मैदान क्षेत्र की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो मैं स्वयं हर संभव प्रयास कर यह कार्य करवाऊंगी। जनता का विश्वास मेरी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।”
शहर के बुद्धिजीवियों और स्थानीय नागरिकों ने महापौर के इस सख्त लेकिन जनहितकारी रुख की खुले दिल से सराहना की है। लोगों का कहना है कि लंबे समय बाद किसी जनप्रतिनिधि ने विभागीय औपचारिकताओं और प्रोटोकॉल की बाध्यताओं को तोड़कर उनकी समस्याओं को इतनी गंभीरता से लिया है। श्रीनगर में मेयर आरती भंडारी की यह सक्रियता न केवल सुस्त पड़े प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही का डर पैदा कर रही है, बल्कि आम नागरिकों के बीच यह विश्वास भी मजबूत कर रही है कि अब उनकी आवाज किसी दफ्तर के बंद दरवाजों में दम नहीं तोड़ेगी।
