Pauri ke Kot Block me prachin surang ki khoj

पौड़ी के कोट ब्लॉक में प्राचीन सुरंग की खोज, पुरातत्व विभाग ने शुरू किया विस्तृत अध्ययन

पौड़ी गढ़वाल।

पौड़ी गढ़वाल जनपद के कोट ब्लॉक क्षेत्र में क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई द्वारा चलाए गए विशेष खोज अभियान के दौरान एक प्राचीन पुरातात्विक सुरंग (गुफा) का पता चला है, जिसे क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस अभियान का नेतृत्व प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई अनिरुद्ध सिंह बिष्ट ने किया, जिसमें संरक्षक सहायक अनिल नेगी, रविंद्र सिंह नेगी और स्थानीय निवासी विजय सजवाण भी शामिल रहे।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार यह गुफा पौड़ी मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर गढ़खेत क्षेत्र से आगे गींठीछेड़ा झरने के नीचे स्थित है। स्थल तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग के बाद करीब एक किलोमीटर का दुर्गम पैदल रास्ता पहाड़ी धारा के अपस्ट्रीम दिशा में तय करना पड़ता है। गुफा का प्रवेश द्वार खड़ी पहाड़ी पर लगभग 20 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जिससे वहां तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण और जोखिमपूर्ण माना जा रहा है।

गुफा का स्वरूप लगभग ऊर्ध्वाधर बताया गया है और इसके भीतर प्रवेश के लिए पत्थरों को काटकर बनाई गई लगभग छह सीढ़ियां मौजूद हैं, जो इसके मानव निर्मित होने की संभावना को बल देती हैं। प्रारंभिक आकलन में यह सामने आया है कि गुफा का उपयोग प्राचीन समय में बाहरी आक्रमणों या जंगली जानवरों से बचाव के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल के रूप में किया जाता रहा होगा। इसमें एक समय में लगभग छह से आठ व्यक्तियों के ठहरने की क्षमता पाई गई है।

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इसके अतिरिक्त गुफा से लगभग 200 मीटर की दूरी पर एक अन्य सुरंग का मुहाना भी चिन्हित किया गया है, जिससे यह संभावना व्यक्त की जा रही है कि दोनों संरचनाएं आपस में जुड़ी हो सकती हैं। हालांकि इसकी पुष्टि विस्तृत सर्वेक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही हो सकेगी।

पुरातत्व दल के अनुसार सुरंग के निर्माण काल का सटीक निर्धारण अभी संभव नहीं है, लेकिन क्षेत्र की भौगोलिक संरचना और प्राकृतिक परिवेश को देखते हुए इसे प्रागैतिहासिक काल से भी जोड़ा जा सकता है। इस दृष्टि से यह खोज मानव सभ्यता के प्रारंभिक निवास और सुरक्षा तंत्र से जुड़े महत्वपूर्ण संकेत प्रदान कर सकती है।

दल ने बताया कि इस स्थल के विस्तृत अध्ययन के लिए जिला प्रशासन के सहयोग से विशेषज्ञों की टीम द्वारा पुनः अभियान चलाया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर वैज्ञानिक उत्खनन भी किया जाएगा। यह खोज जनपद की ऐतिहासिक धरोहर को सामने लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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