Srinagar Medical College Ne Haldwani ENT Sammelan Mein Pratham Sthan Hasil Kiya

श्रीनगर मेडिकल कॉलेज ने हल्द्वानी ईएनटी सम्मेलन में प्रथम स्थान हासिल किया, डॉ अर्जुन सिंह का स्टायलॉइडेक्टॉमी शोध सर्वश्रेष्ठ

श्रीनगर।

हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में उत्तराखंड एसोसिएशन ऑफ ओटोरिनोलैरिंगोलॉजी ऑफ इंडिया के 19वें वार्षिक राज्य स्तरीय सम्मेलन में श्रीनगर मेडिकल कॉलेज ने अपनी शोध क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। सम्मेलन का मुख्य विषय “ईएनटी: सिद्धांत से वास्तविकता तक” रहा जिसमें प्रदेश भर के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों से आए विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया।

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विभिन्न संस्थानों के शोध पत्रों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद श्रीनगर मेडिकल कॉलेज का शोध वैज्ञानिक गहराई, व्यावहारिक उपयोगिता और स्पष्ट निष्कर्षों के कारण निर्णायकों की पहली पसंद बना।ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्जुन सिंह ने “पोस्टऑपरेटिव परिणामों का मूल्यांकन (स्टायलॉइडेक्टॉमी)” विषय पर अपना शोध प्रस्तुत किया।

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निर्णायक मंडल ने उनके अध्ययन को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, डेटा विश्लेषण और मरीजों के उपचार में उपयोगिता के आधार पर सर्वश्रेष्ठ घोषित किया। यह शोध वर्ष 2023 से 2026 के बीच गढ़वाल क्षेत्र के मरीजों पर किए गए विस्तृत अध्ययन पर आधारित है जिसमें सर्जरी के बाद मरीजों के स्वास्थ्य परिणामों का गहन विश्लेषण किया गया और उपचार की प्रभावशीलता स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुई।

डॉ. अर्जुन सिंह ने बताया कि गले में स्थित स्टायलॉइड नामक छोटी हड्डी जब असामान्य रूप से बढ़ जाती है तो मरीज को गले में लगातार दर्द, निगलने में कठिनाई और गर्दन में असहजता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शोध के निष्कर्षों के अनुसार इस स्थिति में स्टायलॉइडेक्टॉमी सर्जरी सबसे प्रभावी और स्थायी उपचार है। जहां दवाइयां केवल अस्थायी राहत देती हैं वहीं सर्जरी से मरीजों को दीर्घकालिक लाभ मिलता है। यह शोध न केवल मरीजों के बेहतर उपचार का मार्ग प्रशस्त करता है बल्कि ईएनटी चिकित्सा क्षेत्र में नई दिशा भी प्रदान करता है।

प्राचार्य प्रो. आशुतोष सयाना ने कहा कि शोध कार्यों को संस्थान में लगातार बढ़ावा दिया जाएगा। डीपीसी जब भी होगी शोध पत्रों पर विशेष ध्यान और महत्व दिया जाएगा। उत्कृष्ट शोध करने वाली फैकल्टी को अतिरिक्त अंक दिलाने का प्रयास किया जाएगा। एक आंतरिक समिति शोध कार्यों का विश्लेषण करेगी। भविष्य में शोध पत्रों पर गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी। शोध कार्यों में प्रतिभाग करने वाले संकाय सदस्यों और रेजीडेंट को बधाई। ऐसे कार्य से अन्य विभागों में उत्साह और प्रोत्साहन के साथ शोध करने की प्रेरणा मिलेगी।श्रीनगर मेडिकल कॉलेज द्वारा हासिल की गई यह उपलब्धि पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है।

मा. चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि इस तरह के उत्कृष्ट शोध न केवल संस्थान की पहचान को मजबूत करते हैं बल्कि प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों को भी नवाचार और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के लिए प्रेरित करते हैं। मुझे विश्वास है कि ऐसे प्रयासों से राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सशक्त एवं प्रभावी होंगी।

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