Devbhoomi Parivar card

सुशासन की ओर कदम: अब हर घर की पहचान होगा ‘देवभूमि परिवार’ कार्ड

भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में बजट सत्र के दूसरे दिन धामी सरकार ने सदन में पेश किए 11 महत्वपूर्ण विधेयक

  • 18 वर्ष से अधिक आयु की वरिष्ठ महिला होगी परिवार की मुखिया, योजनाओं में आएगी पारदर्शिता

भराड़ीसैंण गैरसैंण।
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में चल रहे बजट सत्र के दूसरे दिन धामी सरकार ने सुशासन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पृथ्वीराज धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने सदन के पटल पर 11 महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए, जिनमें ‘देवभूमि परिवार विधेयक 2026’ सबसे खास है। इस विधेयक के माध्यम से राज्य के हर नागरिक तक सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी अड़चन और पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

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डेटा के मकड़जाल से मिलेगी मुक्ति
सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में अलग-अलग विभागों के पास अपना-अपना डेटाबेस होने के कारण लाभार्थियों के सत्यापन में काफी जटिलता आती थी। डेटा के दोहराव और विभागों में समन्वय की कमी से प्रशासनिक संसाधनों पर बोझ बढ़ता था। ‘देवभूमि परिवार’ डेटाबेस बनने से अब ‘सिंगल सोर्स ऑफ ट्रुथ’ (सत्यापित सूचना का एकल स्रोत) तैयार होगा, जिससे अपात्रों की छुट्टी होगी और पात्रों को हक मिलेगा।

महिला सशक्तिकरण पर जोर
विधेयक की बड़ी विशेषता यह है कि इसमें परिवार की वरिष्ठतम महिला सदस्य (18 वर्ष से अधिक आयु) को ही ‘परिवार का मुखिया’ माना जाएगा। इससे न केवल महिलाओं का मान बढ़ेगा, बल्कि योजनाओं का सीधा लाभ घर की धुरी यानी मातृशक्ति को मिलेगा।

सुरक्षा का पूरा पहरा
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह पूरी व्यवस्था डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 के मानकों पर आधारित होगी। नागरिकों का डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा और इसे केवल अधिकृत संस्थागत तंत्र के माध्यम से ही साझा किया जाएगा।

सदन में पेश हुए ये प्रमुख विधेयक:

  1. देवभूमि परिवार विधेयक, 2026
  2. उत्तराखंड दुकान और स्थापन (संशोधन) विधेयक, 2026
  3. उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026
  4. उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026
  5. समान नागरिक संहिता (UCC) से संबंधित प्रावधान
    (सहित कुल 11 विधेयक)

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