देशभर में दीवानी मामलों में निस्पादन याचिका (nispadan yaachika) के लंबित रहने की समस्या ने न्याय प्रक्रिया की गंभीरता पर प्रश्न खड़ा कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में बताया कि देशभर की अदालतों में 8,82,578 निष्पादन याचिकाएं अब भी लंबित हैं। इनमे से कई मामलों में फैसले आ जाने के बावजूद पीड़ितों को अपने अधिकार के लिए वर्षों तक इंतजार करना पड़ रहा है।
Supreme Court की दो सदस्यीय पीठ (Justice JB Pardiwala और Justice Pankaj Mittal) ने स्पष्ट कहा कि यदि डिक्री पास होने के बाद भी उसे लागू होने में सालों लगेंगे, तो यह केवल न्यायपालिका की विफलता ही दर्शाता है।
निष्पादन याचिका का मतलब क्या है?
किसी सिविल केस में जब अंतिम फैसला यानि डिक्री मिल जाती है, तब मुकदमा जीतने वाला व्यक्ति उस फैसले को लागू कराने के लिए निचली अदालत में निष्पादन याचिका (nispadan yaachika) दाखिल करता है। इसका मकसद अदालत द्वारा दिए गए हुक्म का पालन सुनिश्चित करना है।
अदालतों का हाल और सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि अब तक 6 मार्च 2025 के आदेश के बाद भी हाई कोर्ट रिपोर्ट देने में देरी कर रहे हैं। खासकर Karnataka High Court ने तो अब तक आंकड़े ही नहीं भेजे। अदालत ने इसके लिए रजिस्ट्रार जनरल से दो हफ्ते के भीतर जवाब तलब किया है। Supreme Court ने हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि वे लंबित निष्पादन याचिकाओं का शीघ्र निपटारा करें और District Judiciary को मार्गदर्शन दें।
महत्वपूर्ण डेटा
| क्रमांक | बिंदु | आंकड़े |
|---|---|---|
| 1 | कुल लंबित निष्पादन याचिकाएं | 8,82,578 |
| 2 | हाल ही में निपटाई गई याचिकाएं | 3,38,685 |
| 3 | High Court को रिपोर्ट देने की तारीख | 10 अप्रैल 2025 |
| 4 | बकाया जानकारी न भेजने वाला HC | कर्नाटक |
सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी और कदम
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा – अगर निष्पादन याचिकाएं सालों तक लंबित रहेंगी तो डिक्री का कोई औचित्य नहीं रहेगा।
- सभी हाई कोट को छह माह के भीतर लंबित निष्पादन याचिकाएं निपटाने के निर्देश दिए।
- हाई कोट को District Courts से डेटा लेकर प्रगति रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में 10 अप्रैल 2025 तक दाखिल करनी होगी।
- आदेश न मानने वाले जजों की जिम्मेदारी तय होगी।
- यह निर्देश अदालतों में न्याय प्रक्रिया की निष्पक्षता और शीघ्रता के लिए बेहद अहम हैं।
आम जनता पर प्रतिकूल प्रभाव
Nispadan yaachika के लंबित रहने का सीधा असर समाज के लाखों लोगों पर पड़ता है, जिससे जनता को वर्षों तक अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित रहना पड़ता है। फैसले के बावजूद लोगों को निराशा हाथ लगती है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में उनका विश्वास कम होता जाता है और कई मामलों में भुगतान तथा संपत्ति संबंधी विवाद भी बरकरार रहते हैं।
वर्तमान स्थिति:
| विषय | स्थिति (अक्टूबर 2025) |
|---|---|
| लंबित निष्पादन याचिकाएं | 8,82,578 |
| हाल में निपटाई गई याचिकाएं | 3,38,685 |
| प्रगति रिपोर्ट की अंतिम तारीख | 10 अप्रैल 2025 |
| असंतुष्ट हाई कोर्ट | कर्नाटक |
Supreme Court ने स्थिति को “खतरनाक एवं बेहद निराशाजनक” करार दिया है। न्यायपालिका की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है कि निष्पादन याचिकाओं (nispadan yaachika 2025) का शीघ्र निपटारा हो और पीड़ितों को उनका अधिकार मिल सके।



