हल्द्वानी।
जमरानी बांध बहुद्देशीय परियोजना, जो हल्द्वानी काठगोदाम बैराज से लगभग 10 किलोमीटर अपस्ट्रीम में गोला नदी पर प्रस्तावित है, का निर्माण कार्य वर्ष 2024 में प्रारंभ हो चुका है। इस परियोजना के अंतर्गत सिंचाई जल का डायवर्जन काठगोदाम बैराज से किया जाना है। काठगोदाम बैराज से बायीं ओर गौलापार नहर तथा दायीं ओर गौलावार मुख्य नहर निकलती है, जो हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई करती है। परियोजना के अंतर्गत कोल टैक्स चौराहे से निकलने वाली गौलावार फीडर नहर एक प्रमुख नहर है, जो हल्द्वानी शहर से होते हुए बरेली रोड इंडेन गैस प्लांट तक जाती है। यहां से हरिपुरा फीडर नहर और पाहा फीडर नहरें निकलती हैं। हरिपुरा फीडर नहर हरिपुरा बौर जलाशय की ओर जाती है, जबकि पाहा फीडर नहर किच्छा बैराज की ओर जाती है।

उत्तर प्रदेश राज्य के साथ हुए एमओयू के अनुसार हरिपुरा जलाशय से जिला रामपुर और किच्छा बैराज से जिला बरेली को सिंचाई हेतु जल भेजा जाएगा। साथ ही उधम सिंह नगर जिले को भी इन नहरों से सिंचाई जल उपलब्ध कराया जाएगा। परियोजना पूर्ण होने के बाद नैनीताल, उधम सिंह नगर, बरेली और रामपुर जिलों में कुल 57,065 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
सिंचाई उद्देश्यों की पूर्ति के लिए काठगोदाम बैराज से निकलने वाली मुख्य नहरों की रिमॉडलिंग एवं रिनोवेशन का कार्य प्रारंभ किया गया है। इसमें गौलावार मुख्य नहर (1.1 किमी), गौलावार फीडर नहर (16.3 किमी), हरिपुरा फीडर नहर (15 किमी) और पाहा फीडर नहर (8.42 किमी) की रिमॉडलिंग एवं रिनोवेशन शामिल है। कुल 40.82 किमी लंबाई के सापेक्ष अब तक 17.38 किमी लंबाई में कार्य पूर्ण हो चुका है। गुरुवार को अपर जिलाधिकारी राजस्व शैलेंद्र सिंह नेगी के नेतृत्व में अधिकारियों ने स्थलीय निरीक्षण कर निर्माणाधीन नहर कार्यों की समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी ने 15 किमी लंबी हरिपुरा फीडर नहर के निर्माण कार्यों का जायजा लिया और रेगुलेटर वर्क, प्रोटेक्शन वर्क, फॉल तथा क्रॉस ड्रेनेज (CD) कार्यों की तकनीकी गुणवत्ता की समीक्षा की। वन्य जीव संरक्षण हेतु बनाए जा रहे एलिफेंट स्टेप्स, रेप्टाइल क्रॉसिंग और अन्य विशेष प्रावधानों का भी निरीक्षण किया गया। उन्होंने पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन की सराहना करते हुए कार्यों को संतोषजनक पाया।
परियोजना इकाई ने अवगत कराया कि वन क्षेत्र में प्रभावित होने वाले वृक्षों के सापेक्ष वन विभाग द्वारा 10 गुना वृक्षारोपण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, परियोजना इकाई स्वयं भी नहरों के दोनों ओर व्यापक वृक्षारोपण करेगी। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि नहर के तल और पैरापिट पर लगभग 1090 पेड़ उगे होने के कारण पुनर्निर्माण कार्य बाधित हो रहा है। इन पेड़ों के पातन की अनुमति का प्रकरण शासन स्तर पर विचाराधीन है। अपर जिलाधिकारी नेगी ने आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन स्तर से इन समस्याओं के त्वरित निस्तारण हेतु हरसंभव प्रयास किए जाएंगे ताकि 15 किमी की पूर्ण लंबाई में कार्य समय पर संपन्न हो सके।
