हल्द्वानी/नैनीताल।
जिले में निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए 46 विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। जांच में सामने आया कि कई स्कूल अभिभावकों को एनसीईआरटी की निर्धारित सस्ती किताबों के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के लिए बाध्य कर रहे थे, जो सीबीएसई के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। इस कार्रवाई के बाद निजी स्कूल प्रबंधन में हलचल देखी जा रही है।

प्रशासन और शिक्षा विभाग की संयुक्त जांच, जो जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर कराई गई थी, में कई अनियमितताएं उजागर हुईं। जांच में यह पाया गया कि कुछ निजी स्कूलों और बुक सेलरों के बीच साठगांठ चल रही थी। अभिभावकों को निर्धारित दुकानों से ही कॉपी-किताबें खरीदने के निर्देश दिए जा रहे थे, जिसके प्रमाण के रूप में पर्चियां भी बरामद हुईं। यह भी पाया गया कि एनसीईआरटी की पुस्तकों की उपलब्धता के बावजूद महंगी निजी किताबों को अनिवार्य किया जा रहा था, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा था।
मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल ने मामले को गंभीर मानते हुए सभी संबंधित विद्यालयों को नोटिस जारी कर 11 अप्रैल 2026 को शाम 5 बजे तक जवाब देने के निर्देश दिए हैं। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यह कृत्य शासन और सीबीएसई के नियमों के विपरीत है। इसके अतिरिक्त कई विद्यालयों द्वारा अपनी वेबसाइट पर अनिवार्य सूचनाएं और फीस संरचना सार्वजनिक न करने की बात भी सामने आई है, जो नियमानुसार आवश्यक है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं हुआ तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें मान्यता और संबद्धता पर प्रभाव डालने के साथ-साथ विधिक और प्रशासनिक कदम भी शामिल हो सकते हैं। प्रशासन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अभिभावकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।
