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चार धाम यात्रा में स्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा पर जोर, देहरादून में एक दिवसीय सेमिनार आयोजित

देहरादून।

लोक भवन में हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय द्वारा ‘चार धाम यात्रा के दौरान चिकित्सा समस्याएं और सड़क दुर्घटना सुरक्षा उपाय’ विषय पर एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में होने वाली स्वास्थ्य चुनौतियों, विशेषकर हाई एल्टीट्यूड सिकनेस से बचाव और आवश्यक तैयारियों पर विस्तार से जानकारी दी।

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सेमिनार को संबोधित करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने कहा कि चार धाम यात्रा से जुड़े लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आस्था के साथ-साथ सतर्कता भी जरूरी है और यह संगोष्ठी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने विश्वविद्यालय को इस आयोजन के लिए बधाई देते हुए यात्रियों को यात्रा से पहले स्वास्थ्य परीक्षण कराने की सलाह दी, खासकर बुजुर्गों को चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही यात्रा करने की आवश्यकता बताई।

राज्यपाल ने पर्वतीय मार्गों को सुंदर होने के साथ-साथ संवेदनशील बताते हुए दुर्घटनाओं के जोखिम पर भी चिंता जताई और जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं में “गोल्डन आवर” के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से कई जीवन बचाए जा सकते हैं। साथ ही उन्होंने आपातकालीन चिकित्सा तंत्र को और मजबूत करने तथा ट्रॉमा केयर पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।

सेमिनार में हृदय रोग विशेषज्ञ पद्मश्री प्रो. (डॉ.) एस. सी. मनचंदा ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच, ऊंचाई पर धीरे-धीरे चढ़ाई करने और प्रारंभ में एक-दो दिन मध्यम ऊंचाई पर रुककर शरीर को अनुकूल बनाने की सलाह दी। उन्होंने मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए योग और ध्यान को उपयोगी बताया। साथ ही यात्रियों को पल्स ऑक्सीमीटर और रक्तचाप की नियमित जांच, दवाओं का समय पर सेवन और किसी भी लक्षण पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी।

मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के डॉ. पंकज ने पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सुरक्षित ड्राइविंग और भौगोलिक परिस्थितियों को समझने की आवश्यकता बताई। उन्होंने प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि समय पर सही उपचार कई बार गंभीर स्थिति को नियंत्रित कर सकता है।

एम्स गोरखपुर के ऑर्थोपेडिक विभाग के एचओडी डॉ. आशुतोष तिवारी ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में न्यूरोलॉजिकल समस्याओं पर चर्चा करते हुए बताया कि ऊंचाई, ऑक्सीजन की कमी और अत्यधिक ठंड का मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने इसके लक्षणों, जोखिम और बचाव के उपायों के साथ समय पर पहचान और उचित उपचार की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर सुरक्षित चारधाम यात्रा के लिए “पिलग्रिमेज एजुकेशन हैंडबुक” का विमोचन भी किया गया, जिसमें यात्रियों के लिए आवश्यक सावधानियों का विस्तृत विवरण दिया गया है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल, सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन, विधि परामर्शी कौशल किशोर शुक्ल, अपर सचिव रीना जोशी, विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. भानु दुग्गल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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