श्रीनगर गढ़वाल।
श्रीनगर बैकुण्ठ मेले की छठवीं संध्या में राज्य निर्माण आंदोलन के नायकों को नगर निगम की ओर से प्रतीक चिन्ह व शॉल सम्मान भेंट कर सराहा गया।

मेयर आरती भंडारी ने कहा कि ये आंदोलनकारी संघर्ष, त्याग और एकता के प्रेरणास्रोत हैं, इनकी मिसाल आगे भी पीढ़ियों को जागरूक करती रहेगी।

आंदोलन के साथी पार्षदों और स्थानीय नागरिकों ने भी आंदोलनकारियों की भूमिका को पहाड़ का सच्चा गौरव बताया, वही मंच से सम्मानित लोगों ने अपने अनुभव साझा कर युवाओं को जागरूक भागीदारी का संदेश दिया।
मेला संध्या गीत-संगीत में पूरी तरह रंग गया, लोक कलाकार रोहित चौहान, कल्पना चौहान, अमित सागर ने गढ़वाली गीतों, भजनों और लोकप्रिय लोक संगीत से दर्शकों को देर रात तक झूमने को मजबूर कर दिया।

मंच की शुरुआत गणेश, गंगा, शिव आरती से हुई और उसके बाद पहाड़ी गीतों ‘पहाड़ छुटी गे’, ‘मेरी पितरों की बसाई टीरी’, ‘गोरी मुखुड़ी सजीली’, ‘मेरी भनुली जांई च’, ‘बदरीनाथ दैणु’, ‘जै बदरी केदारनाथ गंगोत्री’, ‘चेत की चेत्वाली’, ‘महादेवा’, ‘बाघ का डेरा’ जैसी प्रस्तुतियों ने माहौल को सांस्कृतिक उल्लास से भर दिया।
सोमवार को आयोजित मांगल गायन प्रतियोगिता में 11 मंडलियों ने पारंपरिक भक्ति, लोक संस्कृति और संगीत का प्रदर्शन किया। जय मां धारी देवी मंडली प्रथम, राधा कृष्ण द्वितीय, चंद्रबदनी तृतीय स्थान पर रही। रस्याण प्रतियोगिता में महिला स्वयं सहायता एवं महिला समूहों की टीमों ने स्थानीय व्यंजन दाल के पकौड़े, कंडाली की सब्जी, खीर, पर्वतीय चटनी इत्यादि मनमोहक साज-सज्जा व स्वाद, पारंपरिकता के साथ प्रस्तुत किए।

स्वयं सहायता समूह में तीरथ धाम प्रथम, शक्ति धाम द्वितीय, भागीरथी तृतीय रहे। महिला समूह वर्ग में रश्मि भट्ट, जसोदा देवी, लक्ष्मी देवी क्रमश: प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किया। निर्णायकों ने पाक कला, प्रस्तुति व स्वाद की खूब सराहना की।
प्रतियोगिताओं, लोक उत्सव, सांस्कृतिक समारोहों से बैकुण्ठ मेला श्रीनगर ने स्थानीय विरासत, पारंपरिक व्यंजन, गीत-संगीत, आंदोलन की भावना और सामाजिक चेतना का मजबूत रंग दिखाया।
2025 श्रीनगर बैकुण्ठ मेला: प्रमुख प्रतियोगिता, सम्मान और सांस्कृतिक झलक
| आयोजन/प्रतियोगिता | विजेता / प्रमुख भूमिका | मुख्य आकर्षण | निर्णायक / आयोजन |
|---|---|---|---|
| आंदोलनकारी सम्मान | नगर निगम, मेयर, पार्षद | प्रतीक चिन्ह, शॉल, मंच से संवाद | नगर निगम |
| मांगल गायन प्रतियोगिता | जय मां धारी देवी, राधा कृष्ण, चंद्रबदनी | भक्ति, लोक संस्कृति | — |
| पहाड़ी रस्याण प्रतियोगिता | तीरथ धाम, शक्ति धाम, भागीरथी, रश्मि, जसोदा, लक्ष्मी | पकौड़े, सब्जी, चटनी, खीर | मुकेश भट्ट, सरिता कलूडा |
| सांस्कृतिक संध्या | रोहित चौहान, कल्पना चौहान, अमित सागर | गीत-संगीत, मंचदोस्ती | — |
बैकुण्ठ मेले की छठवीं संध्या ने राज्य आंदोलन, गीत-संगीत, मांगल गायन व पहाड़ी रस्याण प्रतियोगिता से सांस्कृतिक विविधता, एकता, सामाजिक चेतना और परंपरा का उत्कृष्ट समन्वय प्रस्तुत किया।



