श्रीनगर गढ़वाल।
ध्वनि प्रदूषण से निजात और यातायात को अनुशासित बनाने की दिशा में नगर निगम ने एक सराहनीय पहल शुरू कर दी है। महापौर श्रीमती आरती भंडारी की अध्यक्षता में शुक्रवार को नगर निगम सभागार में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में फैसला लिया गया कि शहर को चरणबद्ध तरीके से ‘हॉर्न फ्री जोन’ व ‘नो ओवरटेकिंग जोन’ बनाया जाएगा।

बैठक में पार्षदगण, जीएमओयू-टीजीएमओयू के प्रबंधक, टैक्सी यूनियन, जय बद्री केदार टाटा सूमो यूनियन, अलकनंदा कमांडर यूनियन समिति के प्रतिनिधि और नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में इस अभियान का समर्थन किया और इसे सफल बनाने का संकल्प लिया।
पंचपीपल से स्वीत पुल तक बनेगा हॉर्न फ्री कॉरिडोर
बैठक में पहला बड़ा फैसला यह लिया गया कि पंचपीपल से स्वीत पुल तक का पूरा क्षेत्र प्राथमिक चरण में हॉर्न फ्री जोन घोषित किया जाएगा। इस क्षेत्र में-
- प्रेशर हॉर्न पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाएगा
- केवल आरटीओ द्वारा मान्यता प्राप्त मानक हॉर्न का ही इस्तेमाल हो सकेगा
- अनावश्यक ओवरटेकिंग पर सख्त निगरानी रखी जाएगी
- प्रमुख स्थानों पर बड़े-बड़े “हॉर्न फ्री जोन” के सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे
क्यों जरूरी है यह पहल?
बैठक में यह बात सामने आई कि शहर में प्रेशर हॉर्न का अनावश्यक और अत्यधिक प्रयोग आम नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। खासकर स्कूलों के आसपास पढ़ने वाले बच्चों, अस्पतालों में भर्ती मरीजों और बुजुर्गों को इससे सबसे ज्यादा तकलीफ हो रही है। लगातार तेज ध्वनि मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और कई स्वास्थ्य समस्याओं को भी बढ़ा रही है।
नगर निगम का मानना है कि यदि यातायात अनुशासन और ध्वनि नियंत्रण पर गंभीरता से काम किया जाए तो श्रीनगर का माहौल ज्यादा शांत, सुरक्षित और नागरिक-अनुकूल बनाया जा सकता है।
मेयर ने खुद से की बदलाव की शुरुआत
इस पहल की सबसे प्रेरणादायक बात महापौर श्रीमती आरती भंडारी का खुद का उदाहरण है। उन्होंने 15 दिन पहले अपनी सरकारी गाड़ी से हॉर्न का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया है। पिछले 15 दिनों से उनकी गाड़ी में एक बार भी हॉर्न नहीं बजा है।
यह कदम साफ संदेश देता है कि नियम सिर्फ जनता के लिए नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के लिए भी बराबर लागू होते हैं और बदलाव की शुरुआत ऊपर से होनी चाहिए।
सामूहिक सहयोग से बनेगा आदर्श शहर
सभी परिवहन यूनियनों ने इस अभियान को सफल बनाने का पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है। शहरवासियों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक हॉर्न बजाने से बचें और यातायात नियमों का सख्ती से पालन करें।
महापौर श्रीमती आरती भंडारी ने कहा,
“श्रीनगर को शांत, सुरक्षित और अनुशासित शहर बनाना हमारा लक्ष्य है। अनावश्यक हॉर्न सिर्फ ध्वनि प्रदूषण नहीं बढ़ाता, बल्कि मरीजों, विद्यार्थियों और बुजुर्गों जैसे संवेदनशील वर्गों के लिए भी परेशानी का सबब बनता है। मैंने खुद अपनी गाड़ी में हॉर्न बंद कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि बदलाव की शुरुआत खुद से होनी चाहिए। नगर निगम, परिवहन यूनियनों और सभी शहरवासियों के सहयोग से हम श्रीनगर को हॉर्न फ्री और नो ओवरटेकिंग जोन के रूप में जरूर स्थापित करेंगे।”
नगर निगम की यह पहल फिलहाल शहर में सकारात्मक चर्चा का विषय बनी हुई है। अगर यह अभियान सफल रहा तो श्रीनगर न सिर्फ उत्तराखंड, बल्कि पूरे देश के अन्य नगर निकायों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।
