श्रीनगर गढ़वाल।
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के डॉ. अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र में उत्तराखंड सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित निःशुल्क सिविल सेवा कोचिंग कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों के लिए एक विस्तृत ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को शुरुआती दिशा, अनुशासन और रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करना था।कार्यक्रम में नोडल अधिकारी प्रो. एम.एम. सेमवाल ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की प्रकृति, उसकी बहु-स्तरीय संरचना और दीर्घकालिक तैयारी की जरूरत पर विस्तार से प्रकाश डाला।

प्रो. सेमवाल ने कहा, “सिविल सेवा केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि एक जीवन-शैली और सेवा-भाव का मार्ग है। इसके लिए मानसिक दृढ़ता, निरंतर अभ्यास और स्पष्ट दृष्टि बेहद जरूरी है।” उन्होंने सफलता के तीन मूलभूत स्तंभों पर जोर देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को अनुशासन, लक्ष्य पर एकाग्रता तथा समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
प्रो. सेमवाल ने समझाया कि अनुशासन के बिना नियमित अध्ययन संभव नहीं, लक्ष्य के बिना प्रयास बिखर जाते हैं और समय प्रबंधन की कमी में परिश्रम भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाता। उन्होंने उदाहरण देकर दैनिक अध्ययन-योजना, पुनरावृत्ति और उत्तर लेखन अभ्यास के महत्व को भी रेखांकित किया।
इसके अलावा कोचिंग कार्यक्रम की कार्यप्रणाली, कक्षा-अनुशासन, अध्ययन सामग्री के समुचित उपयोग और आत्ममूल्यांकन की प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि वे केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने तक सीमित न रहें, बल्कि प्रशासनिक सेवाओं में जाकर समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाएं।
कार्यक्रम में डॉ. प्रकाश सिंह, डॉ. अरविन्द सिंह रावत, गौरव पड़ियार और सीता रमोला ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया और उन्हें प्रोत्साहित किया।विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने प्रश्नों के माध्यम से जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। ओरिएंटेशन सत्र सभी के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणास्पद साबित हुआ। अंत में विद्यार्थियों को निरंतर परिश्रम, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और नैतिक मूल्यों के साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया गया।
