पौड़ी। जिले में वित्तीय समावेशन और ऋण वितरण की धीमी गति पर जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। कलेक्ट्रेट सभागार में गुरुवार को आयोजित जिला स्तरीय सलाहकार एवं समीक्षा समिति (डीएलआरसी/डीसीसी) की बैठक में जिलाधिकारी ने बैंकों और रेखीय विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि बैंकों का काम केवल डेस्क पर बैठकर ऋण आवेदनों को निष्पादित करना भर नहीं है, बल्कि अधिकारियों को ग्राउंड लेवल पर उतरकर परियोजना आधारित ऋण वितरण को बढ़ावा देना होगा। बैठक में अनुपस्थित रहने वाले पांच बैंकों के प्रतिनिधियों पर जिलाधिकारी ने कड़ी कार्रवाई का संकेत देते हुए स्पष्टीकरण तलब किए हैं।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी ने जिले के ऋण-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बैंकों को निर्देशित किया कि कृषि, स्वरोजगार एवं अन्य उत्पादक गतिविधियों के लिए ऋण वितरण में तेजी लाएं और सीडी रेशियो को निर्धारित 40 प्रतिशत के मानक तक पहुंचाने के लिए विशेष रणनीति तैयार करें। कृषि क्षेत्र में संस्थागत ऋण की पहुंच बढ़ाने के लिए उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के लक्ष्यों को न्याय पंचायतवार तैयार कर संबंधित बैंक शाखाओं के साथ साझा करने को कहा, ताकि बैंक प्रतिनिधि गांवों में जाकर पात्र किसानों को जोड़ सकें। इसके अलावा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पात्र किसानों को संतृप्त करने के लिए विशेष अभियान चलाने और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए गए।
स्वरोजगार और कल्याणकारी योजनाओं में हो रही देरी पर जिलाधिकारी ने लंबित आवेदनों के त्वरित निस्तारण का सख्त फरमान सुनाया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम), मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, पीएम मुद्रा, पीएम स्वनिधि, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार और होम स्टे योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी आवेदन को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। यदि किसी प्रकरण को अस्वीकृत किया जाता है, तो उसके स्पष्ट और कारणयुक्त कारण आवेदक को उपलब्ध कराए जाएं, ताकि आमजन को परेशानी न हो। होम स्टे योजना में लक्ष्य के अनुरूप प्रगति न होने पर पंचायतीराज और पर्यटन विभाग को संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया। वहीं, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना के वाहन एवं गैर-वाहन मद के लंबित प्रकरणों को शीघ्र निपटाने के निर्देश दिए।
प्रशिक्षण और वित्तीय साक्षरता को लेकर भी प्रशासन का फोकस स्पष्ट रहा। आरसेटी (RSETI) के माध्यम से संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रमाण पत्र बांटना नहीं, बल्कि लाभार्थियों की आय में वृद्धि और स्थायी स्वरोजगार स्थापित करना होना चाहिए। उन्होंने पिछले वर्ष के प्रशिक्षणार्थियों का फॉलोअप करने और विकासखंड स्तर पर नियमित शिविर लगाने को कहा। वित्तीय साक्षरता के तहत सभी बैंक शाखाओं को हर माह कम से कम एक शिविर आयोजित करने का लक्ष्य दिया गया, जिसमें साइबर अपराध, डिजिटल बैंकिंग, यूपीआई और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं (पीएमजेजेबीवाई, पीएमएसबीवाई, अटल पेंशन योजना) की जानकारी दी जाए।
लीड बैंक प्रबंधक किशन रावत ने बैठक में अवगत कराया कि अप्रैल से जून 2026 के दौरान जिले के सभी 15 विकासखंडों में क्रिसिल सीएफएल के पांच केंद्रों के माध्यम से 288 वित्तीय साक्षरता शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशानुसार ग्राम पंचायत स्तर पर भी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लेकर विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। जिलाधिकारी ने लंबित ऋण आवेदनों और सरफेसी एक्ट (SARFAESI) के तहत आने वाले प्रकरणों में दस्तावेजों की पूर्ति शीघ्रता से कराने के निर्देश दिए।
बैठक में जिलाधिकारी ने अल्मोड़ा अर्बन कोऑपरेटिव लिमिटेड बैंक, पंजाब एवं सिंध बैंक, यूको बैंक, इंडसइंड बैंक एवं बैंक ऑफ महाराष्ट्र के प्रतिनिधियों के अनुपस्थित रहने पर कड़ी नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने कहा कि स्वरोजगार योजनाओं में युवाओं पर विशेष फोकस किया जाए और बैंक सखी, स्वयं सहायता समूहों का सहयोग लिया जाए, ताकि योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन पर आय वृद्धि के रूप में दिखाई दे। बैठक में मुख्य कृषि अधिकारी ऋतु कुकरेती जुयाल, जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन भंडारी, अपर पशु चिकित्साधिकारी डॉ. नंदन प्रसाद आगरी, जिला उद्योग केंद्र से प्रबंधक आरपी आर्य, उपासना सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं बैंक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
