Base Hospital Ke Doctoron Ne 12 Din Ki Jung Jeetkar Lautaya Jeevan

सर्पदंश के जहर से बुझने को थी एक जिंदगी, बेस अस्पताल ने 12 दिन की जद्दोजहद से लौटाई सांसें

श्रीनगर गढ़वाल। पहाड़ के दूरस्थ गांवों में सर्पदंश आज भी कितना जानलेवा साबित हो सकता है और समय पर मिली विशेषज्ञ चिकित्सा किस तरह जीवन और मृत्यु के बीच की रेखा बन जाती है, इसकी मिसाल हेमवती नंदन बहुगुणा बेस चिकित्सालय, श्रीनगर में देखने को मिली। जहरीले सांप के डंसने के बाद पूरे शरीर में जहर फैलने से गंभीर रूप से बीमार पड़ी 12 वर्षीय बालिका को अस्पताल के बाल रोग विभाग ने बारह दिन चली अथक चिकित्सकीय जद्दोजहद के बाद मौत के मुंह से खींच लिया।

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मामला रुद्रप्रयाग जिले की बच्छणस्यूं पट्टी के दूरस्थ गांव भराणसैंण से जुड़ा है। गांव निवासी विक्रम सिंह और सरिता देवी की 12 वर्षीय पुत्री प्रतिज्ञा 17 जून को अपने घर के पास घास काट रही थी। इसी दौरान दीवार पर छिपे एक जहरीले सांप ने उसके हाथ पर डंस लिया। सांप के काटते ही बालिका चीख पड़ी। हालत की गंभीरता भांपते हुए परिजन बिना देर किए उसे हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल, श्रीनगर लेकर पहुंचे, जहां उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए तत्काल बाल रोग विभाग में भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया गया।

अस्पताल पहुंचने तक सांप का जहर तेजी से बालिका के पूरे शरीर में फैल चुका था। चिकित्सकीय जांच में स्थिति और भी चिंताजनक निकली—बालिका डिसेमिनेटेड इंट्रावस्कुलर कोएग्यूलेशन (DIC) जैसी गंभीर अवस्था की चपेट में आ चुकी थी। यह वह स्थिति है जिसमें शरीर में रक्त के थक्के बनने की प्रणाली प्रभावित हो जाती है और अनियंत्रित रक्तस्राव का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हालत इतनी बिगड़ चुकी थी कि बालिका के नाक सहित शरीर के अन्य हिस्सों से भी रक्तस्राव होने लगा था।

उपचार की पूरी जिम्मेदारी बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सी.एम. शर्मा के नेतृत्व में संभाली गई। उनके मार्गदर्शन में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंकिता गिरी और विभाग के चिकित्सकों ने बालिका की पल-पल निगरानी करते हुए इलाज को आगे बढ़ाया। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकिता गिरी के अनुसार, बालिका का जीवन बचाने के लिए 40 एंटी स्नेक वेनम (ASV) इंजेक्शन, 17 यूनिट फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (FFP) तथा 4 यूनिट क्रायोप्रेसिपिटेट चढ़ाए गए। इतनी बड़ी मात्रा में रक्त अवयवों की समय पर उपलब्धता ब्लड सेंटर के सहयोग से ही संभव हो पाई, और विशेषज्ञ चिकित्सकों के समन्वित प्रयासों ने बालिका की सांसों की डोर थामे रखी।

इसी बीच जिस हाथ पर सांप ने डंसा था, वहां तेजी से सूजन बढ़ने लगी, जिससे स्थिति और जटिल हो गई। हालात को देखते हुए सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. लक्ष्मण यादव ने प्रभावित हिस्से पर आवश्यक शल्य प्रक्रिया (चीरा) की। इस प्रक्रिया के बाद सूजन में कमी आई और मरीज को काफी राहत मिली।

पूरे बारह दिन तक चले उपचार, गहन निगरानी और चिकित्सकीय प्रयासों के बाद बालिका की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार आना शुरू हुआ और अंततः उसे पूरी तरह खतरे से बाहर निकाल लिया गया। चिकित्सकों का मानना है कि समय पर अस्पताल पहुंचना और बिना किसी देरी के उपचार का शुरू हो जाना ही बालिका के जीवन को बचाने में सबसे निर्णायक साबित हुआ।

इस सफल उपचार में वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. अजय गोस्वामी तथा जूनियर रेजिडेंट डॉ. ज्योति, डॉ. दीपांशु, डॉ. आकाश, डॉ. रोहित और डॉ. अभिलाषा के साथ ही वार्ड की नर्सिंग अधिकारियों, ब्लड सेंटर और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने भी पूरी निष्ठा के साथ सहयोग दिया।

बेटी प्रतिज्ञा को नया जीवन मिलने के बाद उसके पिता विक्रम सिंह और माता सरिता देवी भावुक हो उठे। परिजनों ने बेस अस्पताल के बाल रोग विभाग, सर्जरी विभाग, ब्लड सेंटर, नर्सिंग स्टाफ और उपचार में जुटे सभी चिकित्सकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने उत्तराखंड सरकार का भी धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्हें समय पर उत्कृष्ट और निःशुल्क उपचार उपलब्ध हुआ, जिससे उनकी बेटी की जान बच सकी।

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