विकासनगर (देहरादून)।
वर्तमान समय में जब विश्व विभिन्न चुनौतियों और युद्ध की स्थितियों का सामना कर रहा है, भगवान बुद्ध के विचार और अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। हमें उनके बताए मार्ग पर चलकर आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए।उक्त विचार प्रदेश के पर्यटन, धर्मस्व, संस्कृति, लोक निर्माण, सिंचाई एवं ग्रामीण निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने बौद्ध उत्सव मेला समिति, कालसी द्वारा विकासनगर स्थित हैरिटेज डी.एस. में आयोजित बैसाखी बुद्ध पूर्णिमा समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए।

उन्होंने आयोजकों को बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पूर्वोत्तर के पांच राज्यों में बौद्ध सर्किट कॉरिडोर बनाने की घोषणा की गई है। उनका प्रयास रहेगा कि उत्तराखंड को भी इस सर्किट में शामिल किया जाए। देहरादून स्थित बुद्धा टेंपल बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र है, जहां माइंडरोलिंग मठ, एशिया का सबसे बड़ा स्तूप, शाक्यमुनि बुद्ध की विशाल मूर्ति तथा भित्ति चित्र मौजूद हैं।
महाराज ने बताया कि बैसाख मास की पूर्णिमा को धरती पर करुणा का सूर्य उदित हुआ था। लुंबिनी में राजकुमार सिद्धार्थ का जन्म, बोधगया में बोधि प्राप्ति तथा कुशीनगर में महापरिनिर्वाण – तीनों महापर्व एक ही तिथि को हुए थे। इसी कारण इसे बुद्ध पूर्णिमा या त्रिविधि पावनी भी कहा जाता है।कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने समिति द्वारा आयोजित इस समारोह पर प्रसन्नता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता, शांति और करुणा का संदेश देने वाला प्रेरणादायक कार्यक्रम है। समिति ने बुद्ध के विचारों और सिद्धांतों को समाज में जागृत करने का सराहनीय प्रयास किया है। ऐसे आयोजन सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं और जीवन के सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। भगवान बुद्ध ने अहिंसा, करुणा और सत्य का संदेश दिया है। हमारा कर्तव्य है कि आने वाली पीढ़ियों को इन शिक्षाओं से परिचित कराएं तथा शांति, सहिष्णुता और नैतिकता वाले समाज का निर्माण करें।
इस पावन अवसर पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम बुद्ध के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएंगे।इस अवसर पर समाज कल्याण मंत्री खजान दास, विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, राज्य मंत्री श्यामवीर सिंह सैनी, उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री धर्मवीर सैनी, हरबर्टपुर नगरपालिका अध्यक्ष नीरू देवी, वीरेंद्र सैनी, गुरु दयाल सैनी, चौधरी इंद्राज सिंह सैनी तथा बौद्ध उत्सव मेला समिति के सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
