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Supreme Court: ग्राम न्यायालयों पर पूरे देश में एक फार्मूला नहीं हो सकता, जानें सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि ग्राम न्यायालयों की स्थापना को लेकर पूरे देश के लिए एक समान फार्मूला नहीं हो सकता क्योंकि स्थिति राज्य दर राज्य निर्भर करेगी। सुप्रीम कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें केंद्र और सभी राज्यों को सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में ग्राम न्यायालय स्थापित करने के

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट किया कि ग्राम न्यायालयों की स्थापना के लिए पूरे देश में एक समान फार्मूला नहीं अपनाया जा सकता क्योंकि स्थिति राज्य दर राज्य भिन्न होती है।
संसद ने 2008 में एक कानून पारित किया था जिसके तहत नागरिकों को उनके घर के निकट न्याय उपलब्ध कराने के लिए ग्राम न्यायालयों की स्थापना की जानी थी। इस कानून का उद्देश्य सामाजिक, आर्थिक या अन्य कारणों से न्याय से वंचित होने वाले लोगों को न्याय प्रदान करना था।
इस मामले पर पीठ ने सुनाया फैसला:
जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई की जिसमें केंद्र और सभी राज्यों को सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में ग्राम न्यायालय स्थापित करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।
पीठ ने कहा, ‘आप पूरे देश के लिए एक समान फार्मूला नहीं अपना सकते।’ दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील के इस तर्क को स्वीकार किया गया कि राष्ट्रीय राजधानी में ग्राम न्यायालय की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यहां कोई ग्राम पंचायत नहीं है।
पीठ ने कहा, ‘स्थिति राज्य दर राज्य निर्भर करेगी। पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में वैकल्पिक पारंपरिक प्रणालियां हैं, जहां न्यायालयों के पास काम की कमी है।’
चार हफ्ते के बाद होगी सुनवाई:
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को 12 सप्ताह में हलफनामा दाखिल कर प्रश्नावली के उत्तर देने का निर्देश दिया और मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दी।
सुप्रीम कोर्ट ने पेंशन को दयनीय बताया:
सुप्रीम कोर्ट ने इसी दिन कहा कि यह दयनीय है कि हाई कोर्ट के कुछ सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को मात्र 10 से 15 हजार रुपये पेंशन मिल रही है। शीर्ष अदालत ने अधिकारियों से कहा कि हर मामले में कानूनी दृष्टिकोण नहीं अपनाया जा सकता, कभी-कभी मानवीय दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।
दरअसल, जिला न्यायपालिका से पदोन्नत होने वाले न्यायाधीश नई पेंशन योजना के तहत आते हैं, जबकि वकालत से हाई कोर्ट में पदोन्नत होने वाले पुरानी पेंशन योजना के लाभार्थी हैं, जिससे पेंशन में अंतर हो जाता है।
(इनपुट: पीटीआई)

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