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हरियाणा में बनेगा ग्लोबल एआई सेंटर,मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में वर्ल्ड बैंक के प्रतिनिधियों से बैठक

चंडीगढ़, 29 नवंबर (ट्रिन्यू)

प्रदेश में ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सेंटर स्थापित होगा, जिसमें वर्ल्ड बैंक का सहयोग मिलेगा। इस सेंटर का उद्देश्य युवाओं को आधुनिक एआई कौशल में प्रशिक्षण देना और राज्य में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में शुक्रवार को चंडीगढ़ में वर्ल्ड बैंक के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में इस सेंटर के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस बैठक में उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह भी उपस्थित थे।

सीएम ने बैठक में कहा कि भाजपा का चुनावी संकल्प था कि हरियाणा को एक वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित किया जाए और एआई सेंटर इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इससे न केवल राज्य की तकनीकी क्षमताओं को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास में भी योगदान मिलेगा।

यह सेंटर एआई अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में हरियाणा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में सहायक होगा। भारत के लिए वर्ल्ड बैंक के कंट्री निदेशक अगस्टे टी. कौमे ने कहा कि हरियाणा में आर्थिक विकास की अपार संभावनाएं हैं, विशेषकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के नजदीक होने के कारण विदेशी निवेशकों को आकर्षित करता है। उन्होंने सीएम सैनी के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और वर्ल्ड बैंक की ओर से सहयोग का आश्वासन दिया।

नदियों को जोड़ने के लिए व्यापक योजना

मुख्यमंत्री ने बैठक में वर्ल्ड बैंक से हरियाणा में नदियों को आपस में जोड़ने के लिए एक विस्तृत योजना तैयार करने का अनुरोध किया। वर्ल्ड बैंक ने इस दिशा में सहयोग देने की इच्छा व्यक्त की है। इस योजना का उद्देश्य जल प्रबंधन को बेहतर बनाना और कृषि उत्पादकता में सुधार लाना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नदियों को जोड़ने से राज्य में सिंचाई सुविधाओं में सुधार होगा और अमृत सरोवर योजना को लागू करने में मदद मिलेगी। इसके तहत जल निकायों का पुनर्जीविकरण किया जाएगा और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जल भंडारण क्षमता को बढ़ाया जाएगा।

प्रदूषण मुक्त हरियाणा बनाना लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने 2030 तक हरियाणा को प्रदूषण मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए ‘हरियाणा क्लीन एयर प्रोजेक्ट’ को लागू किया जाएगा, जिसमें कुल 3647 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वर्ल्ड बैंक ने इस परियोजना के लिए 2498 करोड़ रुपये का ऋण देने का वचन दिया है, जबकि राज्य सरकार ने 1066 करोड़ रुपये का योगदान सुनिश्चित किया है। इस परियोजना के तहत वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों, सतत शहरी विकास और स्वच्छ प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दिया जाएगा।

 

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