मंगलौर से चौथी बार विधायक और कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव काजी निजामुद्दीन ने हरिद्वार में एक खास मुलाकात की। उन्होंने श्रीहरिहर आश्रम के पीठाधीश्वर और जून अखाड़ा के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद नन्द गिरी जी महाराज से भेंट कर होली की शुभकामनाएं दीं। यह मुलाकात सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मेल का अनूठा संगम बन गई।

स्वामी अवधेशानंद गिरी ने काजी निजामुद्दीन को आशीर्वाद देते हुए उनके परिवार की पुरानी यादों को ताजा किया। उन्होंने कहा कि काजी निजामुद्दीन के स्वर्गीय पिता काजी मोहिउद्दीन और दादा काजी अब्दुल वली से उनके पारिवारिक और निजी रिश्ते रहे हैं। इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने काजी निजामुद्दीन और उनके बेटे काजी सिराजुद्दीन को भी आशीर्वाद दिया, जिससे एक नया अध्याय जुड़ गया। महाराज ने काजी को अपनी अंग्रेजी किताब “अन फोल्डिंग डिवाइन विद इन” भेंट की, जो आध्यात्मिक विकास और आत्मजागरूकता की राह दिखाती है।
काजी निजामुद्दीन ने स्वामी अवधेशानंद की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि महाराज सिर्फ संत, धर्म मनीषी, कथावाचक या उद्घोषक ही नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के संरक्षक और विश्व साहित्य व भाषाओं के जानकार हैं। वे पूरी मानवता के कल्याण के लिए काम कर रहे हैं और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान रखते हैं। काजी ने यह भी कहा कि अगर आज भारत रत्न का असली हकदार कोई है, तो वह स्वामी अवधेशानंद नन्द गिरी जी महाराज हैं।
इस मौके पर लाला पवन कुमार, शारिक चानना सहित कई लोगों ने भी महाराज से आशीर्वाद लिया। मुलाकात के अंत में स्वामी अवधेशानंद ने काजी निजामुद्दीन को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया, जिससे यह मुलाकात और यादगार बन गई। यह भेंट न सिर्फ व्यक्तिगत रिश्तों की गर्माहट लेकर आई, बल्कि समाज में एकता और आध्यात्मिकता का संदेश भी दे गई।